कल कल बहता जल - कविता
कल कल बहता जल
हिंदी कविता
ज्यादा नहीं कम से काम चला लो
अगर सीधा नहीं न समझे तोऐसे समझो कि होता यदि
जल ईंधन तो भी क्या ऐसे ही बहाते
सोच कर ईंधन अगली पीढ़ियों का ही
कुछ मितव्ययित्ता अपना लो।
जल ही जीवन है , सभी जाने हैं
पर फिरे अनजान हैं।
जानबूझ कर नादान क्यों बने।
बने बनाये संसार को क्यों उजाड़े।
समस्या है तो हल भी है।
इच्छाशक्ति का बल भी है।
देख कर अपनी बनायीं दुनिया कि ये दशा ,
ईश्वर की आँख में भी नमी है।
अब भी न समझे हम तो
सर्वत्र गमी ही गमी है।
जल जीवन का सार है।
जल से ही संसार है।
पर फिरे अनजान हैं।
जानबूझ कर नादान क्यों बने।
बने बनाये संसार को क्यों उजाड़े।
समस्या है तो हल भी है।
इच्छाशक्ति का बल भी है।
देख कर अपनी बनायीं दुनिया कि ये दशा ,
ईश्वर की आँख में भी नमी है।
अब भी न समझे हम तो
सर्वत्र गमी ही गमी है।
जल जीवन का सार है।
जल से ही संसार है।
लेखिका की कलम से
दोस्तों,
भावनाओं से ओत प्रोत मेरी अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप मुझे फाॅलो करना न भूलें।
धन्यवाद
🙏 आभार
प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'

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