ख़ामोशी - कविता

ख़ामोशी - भावपूर्ण हिंदी कविता

ख़ामोशी

हिंदी कविता


ख़ामोशी की ज़ुबान काफ़ी स्पष्ट होती है,

अनकहा अनसुना सब बयान कर देती है। 

खामोश नज़रों का होता है तीक्ष्ण इशारा,

खामोश निगाहों से बच ना पाता कोई बेचारा। 

खामोशी के होते हैं भीषण घातक वार,

कोडे की चोट से भी दर्दनाक इसकी मार। 

यध्यपि खामोशी के हो जाते हैं अनेक अर्थ,

तथा खामोशी बिखेर जाती है अनेक रंग। 

तथापि खामोश निगाहों में होता है अजीब रीतापन,

मन में जगा जाती है एक तीखी चुभन। 

कभी खामोशी से ही बन जाते विचित्र अफ़साने,

और खामोशी ही सुना जाती मोहक तराने। 

अधिकांशत: खामोशी के भीतर होता एक उफनता सागर,

चाह कर भी व्यक्त कर पाती वो हृदय के उद्गार।

खामोशी को अभिव्यक्ति देते हृदय के हाव-भाव,

खामोशी नहीं प्रकट करती कि है कोई अभाव। 

गंभीरता, परिपक्वता और खामोशी का साथ है पुराना,

वाचलता भी करती है नमन जिसको अपना।

मुख से निकली वाणी लौट कर ना आए,

खामोशी घाव भी दे जाए पर दोष उस पर ना आए। 

20 मई 1993
रात्रि आठ बजे

लेखिका की कलम से  
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धन्यवाद 🙏  
- प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'  

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