लक्ष्मण रेखा - कविता
लक्ष्मण रेखा
हिंदी कविता
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला हुआ,
हिंसक था, शर्मनाक था, निंदनीय है।
लेकिन तस्वीर का इक दूसरा पहलू भी देखें,
तह तक जाने से ही गहराइयाँ मिलती हैं।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का यह कदापि अर्थ नही कि,
भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जाए।
व्यंग में जब होता है समावेश अश्लीलता का,
तब ये स्वतंत्रता नही, स्वच्छंदता बन जाती है।
ज़रूरत है कि लक्ष्मण रेखा तय की जाए,
बात ज़ुबान /कलम पे रोक की नहीं हैं.
मर्यादा रखे अपनी बेबाकी पे
कि आपकी कलम की आज़ादी से ,
ना हो भंग किसी की आस्था, विश्वास का
हैं हम सभ्य एवं स्वतंत्र समाज़ के अभिन्न अंग।
गया दौर कबीलाई हिंसा का
कि जहाँ हिंसा, बदला भी ज़ायज़ था
और भावनाएँ आहत करना भी।
लिखे, दिखाए, अपनी बात कहे
अपने आप को अभिव्यक्त करे
पर कुछ इस अंदाज़ में
कि आपकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
कहीं स्वच्छंदता का रूप ना ले...
तभी रोक लगेगी इन हिंसक प्रवृतियों पर
अमन चैन का माहौल बनेगा
जब किसी के फेके काँटे से
किसी और का पाँव ज़ख्मी ना होगा...
लेखिका की कलम से
दोस्तों,
भावनाओं से ओत प्रोत मेरी अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप मुझे फाॅलो करना न भूलें।
धन्यवाद
🙏 आभार
प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'

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