एक लड़की भीगी भागी सी - कहानी

एक लड़की भीगी भागी सी

हिंदी कहानी 

समीर ऑफिस से थोड़ा जल्दी ही  गया था। शाम से ही मौसम का मिजाज़ कुछ बिगड़ा हुआ है। रह रह कर बूंदाबांदी हो रही है।  माँ मामाजी की तबीयत खराब सुनकर दोपहर में ही मामाजी के शहर के लिए निकल पड़ी थी। तीन घंटे का रास्ता था। पहुॅ॑चकर समीर को फोन कर दिया था और साथ में बता दिया था कि मामाजी की तबीयत अब ठीक है तो वो कल जाएंगी। आज रात का खाना बनाकर माँ  गईं थीं। बाकी समीर सब खाना बनाना जानता है तो उसने माँ से कह दिया कि मामाजी के पूरी तरह स्वस्थ होने पर जाएं और उसकी चिंता नहीं करें।

कपड़े बदल कर समीर ने चाय बनाई और बरामदे में जाकर आराम कुर्सी पर अखबार पढ़ते हुए चाय पीने लगा। बरामदा आधी शेड से कवर की हुई है परन्तु हल्के हल्के बारिश के छींटें कभी कभार पड़कर अखबार को भिगोने लगे तो समीर लिविंग रूम में आकर बैठ गया। टेलीविजन चलाकर समाचार देखने लगा। अचानक से ब्रेकिंग न्यूज देखकर चौंक गया। सरकार ने कोविड-19 के कारण देश भर में पूर्णतः लाॅकडाउन लगा दिया। यानि जो जहां है वहीं रहे। आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया। वाहनों के चक्के रोक दिये गये। कोई कहीं नहीं या जा सकता है।

तत्काल ही समीर ने माँ  को फोन कर जानकारी दी। और उन्हें सरकार के अगले आदेश तक मामाजी के यहां रहने को बोला।

रात के नौ बज रहे थे। बारिश भी तेज हो चली थी। समीर मन में सोच रहा है कि कल से कांता बाई भी नहीं पाएगी। घर में एक ड्राइंग कम डाइनिंग रूम और दो बेडरूम हैं। झाड़ू-पोछा एक या दो दिन छोड़कर करने से भी काम चल जाएगा।

इसी उधेड़बुन में डूबा समीर खाना फ्रिज से निकाल कर लाया और गर्म करने लगा।

इतने में दरवाज़े पर खटखटाहट सुनाई दी। समीर ने पहले इसे मन का वहम समझा। परंतु दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ बढ़ती ही गई। समीर ने मन में सोचा कि इस वक्त कौन गया। गैस बंद कर उसने दरवाज़ा खोला।
दरवाज़े के दूसरी ओर एक लड़की बारिश में सराबोर खड़ी थी। उसके कपड़े पूरी तरह भीग गए थे।

दरवाज़ा खुलते ही उस लड़की ने कहा," प्लीज़ मुझे  अंदर आने दीजिए। मैं काफ़ी परेशानी में पड़ गई हूँ"

समीर ने उसे अंदर आने की जगह दी। साथ में एक तौलिया लाकर दिया।

लड़की बोली," मैं आज यहां एक इंटरव्यू के लिए आई थी। शाम को बस स्टैंड पर पहुॅ॑चने में देरी हो गई और लास्ट बस भी छूट गई। घर पापा से बात की तो उन्होंने बताया कि देश भर में लाॅकडाउन लगा दिया गया है। फिर  उन्होंने कामिनी  आंटी का पता दिया कि वो इसी शहर में रहती हैं तो वहां चली जाओ। फिर कैसे भी करके पापा मुझे आकर ले जाएंगे।"

थोड़ा रुक कर उसने पूछा," ये कामिनी  आंटी का घर है ना?"

समीर बोला," जी हाँ  परंतु माँ  यानि आपकी कामिनी  आंटी तो मामाजी के यहां सीतापुर   गईं हैं आज दिन में ही।"
फिर उसने पूछा," आप माँ को कैसे जानती हैं?"

लड़की ने बताया," मैं आंटी से कभी नहीं मिली हूँ  मेरे पापा और आपके मामाजी बचपन के दोस्त हैं।"

समीर ने उसके पापा का नाम पूछा। सुनते ही वो उछल पड़ा और कहने लगा,"मैं बचपन में अंकल यानि आपके पापा के घर कई बार गया हूँ  वो दो चोटी वाली छोटी सी लड़की तुम ही हों जिसको बचपन में खूब चिढ़ाया है।"

लड़की बोली," अच्छा बंटी  हों क्या आप?"

समीर के घर का नाम बंटी  है। वो हां में सिर हिलाते हुए बोला ," और तुम काव्या  हों?"

काव्या  ने सिर हिला कर हामी भरी।

समीर ने काव्या  को कहा कि पहले वो अपने घर फोन करके बता दे। समीर ने भी काव्या  के पापा से बात की और उन्हें परेशान ना होने को कहा। सुबह होने पर वो किसी तरह पास बनवाने की कोशिश करेगा, ऐसा भी बोला।
समीर ने अपनी माँ को फोन किया और उन्हें सभी बातें बताईं। माँ ने काव्या  का ध्यान रखने को कहकर काव्या  से बात की और उसे बिल्कुल चिंता नहीं करने को कहा।

समीर ने काव्या  को माँ  की अलमारी से कपड़े लेकर भीगे कपड़े बदलने को कहा," तुम कपड़े अपने हिसाब से देख लो। ऊपर के खंड में दीदी के भी कपड़े रखे हैं। दीदी ससुराल से आती है तो पहन लेती है। फटाफट बदल कर आओ, मैं गरमागरम चाय बनाता हूँ"

काव्या  दीदी का सूट पहनकर गई। समीर ने उसे चाय देते हुए कहा," अदरक वाली चाय पियो। मैं खाना गर्म कर लाया।"

काव्या,  जो बारिश में भीगने की वजह से कई बार छींक चुकी थी, ने पूछा," और आपकी?"

समीर बोला," तुम्हारे आने से पहले ही मैंने चाय पी है।"

समीर किचन में गया। दाल और सब्जी गर्म करने से पहले छोटे कुकर में जीरा राइस चढ़ा दिए। खाना गर्म करते और परसते परसते जीरा राइस दो सीटी लगकर तैयार हो गए।

काव्या  किचन में कप रखने आई तो वो बोली," आप खाना खा लो, मुझे भूख नहीं है।"

समीर बोला,"तुमने कौन सा खाना खा लिया होगा, जो भूख नहीं है। चिंता मत करो मैंने जीरा राइस बना लिए हैं खाना कम नहीं पड़ेगा।"

काव्या  बोली," मैं यही समझी थी। भूख तो मुझे भी जोरों से लगी है।"

"तो आओ फिर , खाना शुरू करो।"

खाना खाकर माँ के कमरे में काव्या  को सोने को कहा समीर अपने रूम में सोने चला गया। काव्या  दिन भर की थकी हुई थी तो बिस्तर पर लेटते ही सो गई।

समीर ने कुछ देर आज की बारिश और उसमें अचानक से घर में आई हुई काव्या  के बारे में सोचा। फिर धीरे-धीरे वो भी नींद के आगोश में सो गया।

*********************************************************************************

सुबह उठते ही चाय ब्रेड का नाश्ता काव्या  के साथ कर, समीर ने अपने दोस्त अमित  के डैडी को  फोन लगाकर काव्या  को घर पहुँचाने के लिए आग्रह किया और उन्हें बताया कि कैसे वो इंटरव्यू देने आई थी और यहां फंस गई। अमित  के पापा कमिश्नर हैं तो उन्होंने काव्या  के सीतापुर जाने का सारा इंतजाम कराया।

काव्या  के साथ समीर भी सीतापुर  गया और लौटते समय अपनी माँ को भी अपने साथ ले आया।

आज इस बात को दो साल हो गए हैं। लाॅकडाउन खुल चुका है। कोविड-19 का वैक्सीन चुका है।आज भी झमाझम बरसात हो रही है। माँ और समीर बरामदे में बैठकर बारिश का लुत्फ उठा रहे हैं। समीर को आज भी वो बरसात की रात याद है जब एक भीगी भागी सी  लड़की ने अचानक ही दरवाजा पर दस्तक दी थी।

अचानक उसकी सोच में ब्रेक लगता है और काव्या  एक हाथ में पकौड़े की प्लेट और दूसरे में चाय लेकर आती है और कहती है, "कहाँ सोच में डूबे हैं, चलिए चाय पकौड़े लीजिए।"

समीर प्यार से काव्या  को देखता है और चाय का घूंट भरता है। वो लड़की अब उसकी जीवन संगिनी बन चुकी है। उस दिन दरवाज़े पर हुई दस्तक ने सीधे दिल पर दस्तक दी थी। समीर और काव्या  के दिल के तार जुड़ गए थे उसी दिन। बाकी सब बड़ों ने मिलकर कर दिया। कामिनी  जी अपने बहू-बेटे की प्यारी जोड़ी को दिल ही दिल में ढेर सारा आशीर्वाद देती हैं।

लेखिका की कलम से 

दोस्तों,
आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में अवश्य साझा करें। यदि मेरी इस प्यारी सी रचना ने आपके दिल को छू लिया है तो कृपया लाइक और शेयर करें। भावनाओं से ओत प्रोत मेरी अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप मुझे फाॅलो करना न भूलें।
धन्यवाद 
🙏 आभार
प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'

टिप्पणियाँ

लोकप्रिय पोस्ट

हिंदी साहित्य का महत्व: इतिहास, काल विभाजन और आधुनिक जीवन में इसकी प्रासंगिकता