नियम केवल बड़ी बहू के लिए ही क्यों?
नियम केवल बड़ी बहू के लिए ही क्यों
हिंदी कहानी
प्रकाश और वैदेही की शादी कुछ ही दिन पहले हुई है| सभी मेहमान अब वापिस जा चुके हैं| घर में सुनीता जी, रमेश जी, उनका बड़ा बेटा प्रकाश , नई नवेली बहू वैदेही और छोटा बेटा आकाश हैं|
आज से सभी अपने अपने काम पर जाने वाले हैं| रमेश जी, प्रकाश अपने अपने ऑफिस जाएंगे| आकाश कल से कॉलेज जाएगा| वैदेही की एक हफ्ते बाद जॉइनिंग है|
आज सुबह उठकर वैदेही टूथपेस्ट कर के चाय बनाने किचन में आ गई| कल तक तो बहुत सारे मेहमान घर पर थे तो कोई न कोई बना देता था|
किचन में सुनीता जी पहले से ही मौजूद थीं|
वैदेही
ने प्रणाम करके कहा, "मम्मी जी, चाय बनाने जा रही हूँ, सब ले लेंगें?
सुनीता
जी, "एक बात बताओ वैदेही
तुम नहा ली हो?"
"बस चाय पी कर नहाने ही जाउंगी मम्मी जी|"
"देखो बेटा, गैस के एक चूल्हे पर दूध उबालने रखा है और दूसरे पर नहाने के लिए पानी गरम हो रहा है| गीजर खराब हो गया है, तो तुम ऐसा करो कि नहा कर आ जाओ, पानी गरम हो गया है| आकर चाय बना लेना| खुद भी पीना और सबको पिलाना|"
"जी मम्मी जी, जैसा आप कहें|
कहकर वैदेही नहाने चली गई| सोचा कल से थोड़ा जल्दी उठकर चाय बना कर नहाएगी अपने घर में भी टूथपेस्ट करके चाय पीने के बाद नहाती थी|
अगले दिन सुबह थोड़ा जल्दी उठ किचन में गई तो वही कल वाला किस्सा दोहराया गया|
करीबन दस बारह दिन ऐसा ही हुआ| और एक दिन तो सुनीता
जी ने कह दिया कि बिना नहाए चाय पीना अच्छी बात नहीं है|
वैदेही
भी समझ गई थी | वो धीमी गैस पर दूध उबालना और दूसरी गैस पर पानी खौलाना, सब उसे चाय पीने से रोकने के लिए ही था| नहाने के बाद सब कुछ मिल जाता था| मम्मी जी को चाय बनाना खास पसंद भी नहीं है तो ज्यादातर वैदेही
ही बनाती है|
कभी कभी वैदेही
के सिर में भी दर्द हो जाता है| तब रमेश
जी या प्रकाश के बोलने पर नहाने से पहले चाय मिल जाती है, पर मम्मी जी का मूड खराब हो जाता है|
कुछ साल बाद , आकाश की प्रीति से धूमधाम से शादी होती है| प्रीति की आज घर में दूसरी सुबह है|
किचन में वैदेही
नहा धो कर पहुँचती है तो क्या देखती है , मम्मी जी चाय बना रही हैं|
"मैं आ रही थी मम्मी जी| आप रहने दें मैं बनाती हूँ| "
"ठीक है, वैदेही
बना लो| और प्रीति
के लिए भी बना लेना| "
"जी, मम्मी जी | प्रीति
इतनी सुबह सुबह उठ कर नहा भी ली| "
"अरे नहीं| आकाश
आया था अभी| वो कह रहा था कि प्रीति
बेडटी पीकर ही उठ पाती है, इसलिए उसके लिए चाय बना लो| "
वैदेही
चाय बनाते बनाते मन में सोच रही है कि मैंने तो पेस्ट करने के बाद चाय पीने को बोला था और मुझे नहाने के बाद चाय पीने की अनुमति दी गई और अपनी छोटी बहू के आते ही मम्मी जी के सारे सिद्धांत हवा हो गए और वो स्वयं चाय बनाने लगीं|
वैदेही
के दिल को ठेस लगी और ये बात कब तक उसका दिल दुखाएगी, पता नहीं|
दोस्तों, ऐसा कई बार देखा जाता है कि जो नियम-कानून या रीति-रिवाज बड़ी बहू के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं वही छोटी बहू के आने पर उसकी सुविधा के अनुसार परिवर्तित कर दिए जाते हैं या ढील दे दी जाती है| अब चाहे आप समय की मांग कहो या कोई और हवाला दो, बड़ी बहू के मन में तो खटास आ ही जाती है|
क्या ही अच्छा होता,अगर सुनीता
जी वैदेही
के लिए अपने नियम में ढील देकर उसे सहर्ष बिना नहाए चाय पीने की अनुमति दे देतीं|
बड़ों को भेदभाव न करते हुए सभी के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और छोटों की इच्छा का सम्मान करना चाहिए| तभी सारे परिवार के लोग मन से साथ होंगे| घर में सबके साथ बराबरी का व्यवहार करना चाहिए|
दोस्तों, हो सकता है आपमें से कईयों ने भी ऐसा भेदभाव देखा हो या सहा हो| मेरी यह रचना कैसी बन पड़ी है, कृपया कर कमेंट सेक्शन में अपनी अमूल्य राय से अवगत कराइये| आपकी पसंद और नापसंद दोनों ही बताइगा| अगर पसंद आई हो तो लाइक और शेयर भी कीजिएगा|
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