लिंग परिक्षण नहीं करवाऊंगी

घर में घुसते हुए माँ  ने सुनिधि  से पूछा, "कोई फोन आया, अक्षित का?" 

"नहीं माँ और आएगा भी नहीं। आप समझती क्यों नहीं हैं।" सुनिधि  ने कहा।

माँ ने सिर हिलाते हुए कहा,"बेटा, मैं सब समझती हूँ। पर प्राची  की माँ का आज फोन आया था। कह रही थीं कि सुनिधि  काफी दिनों से यहाँ रह रही है। कब जा रही है। कुछ गड़बड़ तो नहीं? तुम्हारी टोह ले रही थीं।"

"माँ, प्राची  ने पहले ही सब बता दिया होगा। आपसे सुनना चाह रही होंगी।" सुनिधि  ने कहा।

"सही कह रही हो। आखिर कब तक मैं अक्षित की करतूतों पर परदा डालती रहूंगी।" माँ बोली।

माँ यानि मधुराजी एक विधालय में शिक्षिका हैं।उनके पति कमलकांत     जी का देहांत गत वर्ष दिल का दौरा पड़ने से हो गया। मधुराजी की बड़ी बेटी सुनिधि  और एक बेटा समीर   है। समीर  की शादी चार साल पहले प्राची  से हुई है।प्राची  एक कोचिंग संस्थान में पढ़ाती है।समीर और प्राची  के दो साल का प्यारा और नटखट बेटा है जिसका नाम विवान है।

सुनिधि  ने कत्थक में परास्नातक की डिग्री की है। वह शहर के सरकारी कत्थक केंद्र में बतौर सीनियर कत्थक शिक्षिका कार्य करती है। सुनिधि  की शादी उसी शहर में रहने वाले सिविल इंजीनियर अक्षित से छह साल पहले हुई है। अक्षित और सुनिधि  की एक प्यारी सी चार साल की बेटी अरु   है।

सुनिधि  के ससुराल में सास मोहिनी  जी और ननद वाणी है। पुश्तैनी घर है। ससुर जी राधेश्याम जी का स्थानांतरण दूसरे शहर में होने के कारण महीने में एक बार आ पाते हैं।

अभी दो महीने पहले सुनिधि  पुन: गर्भवती हुई। 

दो महीने बीतते न बीतते सुनिधि  की सास मोहिनी  जी ने कहना शुरू कर दिया कि "इस बार तो पोता ही होना चाहिये। महंगाई के इस जमाने में दो बच्चे बहुत होते हैं। लड़की एक ही बहुत है। इस बार लड़का ही होना चाहिए।"

अब वो सुनिधि  के ऊपर दबाव डालने लगी कि वो लिंग जाँच करवाए और यदि लड़की हो तो भ्रूण अबार्शन करवा लें।

इन सब के बीच में जब वो अक्षित की ओर देखती तो पाती कि अक्षित भी अपनी माँ से सहमत है। वो भी लिंग जाँच करवाने के पक्ष में है। 

ननद वाणी भी माँ की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहती,"मम्मी सही कहती हों। भाभी की भाभी प्राची  के तो पहली संतान ही बेटा है। तो यहाँ कम से कम दूसरा तो लड़का होना चाहिये। इसलिए लिंग परीक्षण करवा कर लड़की हो तो अबार्शन करवा लो।

परेशान हो गई थी सुनिधि । उसने सबको समझाने की भरसक कोशिश की ," आज के युग में लड़का-लड़की बराबर हैं। लिंग परीक्षण कानूनन अपराध है और वो नहीं करवाएगी। जो भी भगवान की देन हो उसे स्वीकार करना चाहिए।"

और तो और मोहिनी  जी ने सुनिधि  की माँ मधुराजी से भी इस बारे में सुनिधि  को समझाने को कहा।कि वह परीक्षण करवा ले नहीं तो अगर लड़की हो गई तो सुनिधि  को सदा के लिए मायके भिजवा देंगी।

मधुराजी मोहिनी जी औरअक्षित के विचार जानकर हतप्रभ रह गईं। उन्होंने बहुत समझाने की कोशिशें कीं। पर कोई नतीजा नहीं निकला।

अभी आठ दिन पहले अक्षित सुनिधि औरअरु को मधुराजी के पास छोड़ गया ये कहकर कि लिंग जाँच करवाने के लिए तैयार हो, तभी घर आना नहीं तो अपनी माँ के घर रहो।

ऐसे ही दो हफ्ते और बीत गए। सुनिधि  को तीसरा महीना पूरा होने को है। वो माँ के घर से ही अपने संस्थान जाती है।

और एक दिन अक्षित अपनी माँ मोहिनी  जी के साथ आ धमका। सुनिधि  से बोला,"चलो अपने घर चलो।"

सुनिधि  और मधुराजी को अचानक उनका बदला व्यवहार पल्ले नहीं पड़ा।

सुनिधि  से रहा नहीं गया। उसने कहा,"मै लिंग परीक्षण नहीं करवाउंगी।"

दोनों ने सुनिधि  और उसकी माँ को बोला कि अब ऐसी कोई बात नहीं है।

विश्वास कर मधुराजी ने सुनिधि  को अक्षित और मोहिनी  जी के साथ उसके ससुराल भेज दिया।

सुनिधि  को ससुराल आए तीन दिन हुए थे कि मोहिनी  जी और अक्षित ने कहा,कि अब उसे जल्दी जल्दी चेकअप कराते रहना चाहिए। तो कल डॉक्टर को दिखाने चलते हैं।

सुनिधि  खुश थी कि इन लोगों का सोचने का रवैया तो बदला। माँ मधुराजी को सब ठीक होने की सूचना फोन पर दे दी उसने।

अगले दिन अरु स्कूल गई और घर पर वाणी को छोड़ ये तीनों डॉक्टर को रुटीन चेकअप कराने निकले।

थोड़ी दूर जाकर जब अक्षित ने कार दाएं की जगह बाएं मोड़ी तो सुनिधि  ने कहा,"डॉक्टर का नर्सिंग होम दाएं साइड पर आता है। अक्षित गाड़ी गलत मोड़ ली।"

अक्षित ने कहा,"मैंने एक और अच्छा डॉक्टर मालूम किया है जिसके यहाँ मैटरनिटी सम्बंधित बेहतर सुविधाएं हैं। चल के देख लेते हैं। तुम्हें ठीक लगे तो यहीं डिलीवरी करवा लेंगे।"

"ठीक है।" सुनिधि  बोली।

वहाँ पहुँचे तो डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा कि पहली तिमाही में बच्चे की बढ़वार देखने के लिए जरूरी है।

सुनिधि  अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए डॉक्टर के केबिन से सटे रूम में लेट गई। 

तभी पास के केबिन से मोहिनी  जी की आवाज सुनाई दी। वो कह रही थीं, "डॉक्टर साहब अगर गर्भ में लड़की हो तो फौरन ही अबार्शन कर देना। "

डॉक्टर बोला,"माताजी, आप चिंता नहीं करो। अगर लड़का हुआ तो ठीक। नहीं तो आज के आज में अबार्शन कर देंगे। सब इंतजाम कर दिया है। सुनिधि  को भनक भी नहीं लगेगी। अल्ट्रासाउंड रूम से एनस्थीसिया देकर प्रोसीजर कर देंगे। साथ वाला रूम तैयार है। बस चाय पीकर जा रहा हूँ।"

सुनिधि  ये सुन कर सन्न रह गई। तत्काल पुलिस कंट्रोल रूम फोन कर सब बताया और उन्होंने कहा कि वे तुरन्त पहुँच रहे हैं। मधुराजी को भी फोन कर बता दिया।

यहाँ डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड रूम में प्रवेश किया उधर पुलिस और मधुराजी नर्सिंग होम आ गए। पुलिस को सामने देख डॉक्टर के होश उड़ गए और उसने सब सच उगल दिया कि लिंग परीक्षण करवाने के लिए सुनिधि को लाए हैं और लड़की होने पर अबार्शन करनेवाले थे। पुलिस ने तीनों को अरेस्ट कर लिया और नर्सिंग होम सील कर दिया। पुलिस ने सुनिधि की हिम्मतऔर समझदारी की तारीफ की।

जाते जाते अक्षित ने सुनिधि  को धमकी दी कि उसने उसे पकड़वाकर अच्छा नहीं किया। अब कैसे पालेगी अकेले बच्चों को।

इस पर सुनिधि  ने जबाव दिया,"तुम जैसे पिता के साये को भी अरुऔर अपने होने वाले बच्चे पर नहीं पड़ने दूंगी। मैं काफ़ी हूँ ,अपने बच्चों को पालने के लिए।"

ऐसा कहकर मधुराजी के साथ सीधे निकलती चली गई।

दोस्तों, आज के इस दौर में भी लिंग आधारित भेदभाव से महिलाएं गुजरती हैं। उन पर अपने ही बच्चे के लिंग जाँच का दबाव बनाया जाता है। सुनिधि  ने हिम्मत और साहस से काम  लिया एवम् अपने अजन्मे शिशु का लिंग पता करने का डटकर विरोध किया। कहीं ये लोग सफल हो जाते और सुनिधि  के गर्भ में लड़की होती तो ये लोग उसे गर्भ में ही मार डालते। इस कल्पना से ही मन क्रोध से भर जाता है। वास्तव में ऐसे नीच मानसिकता वाले लोगों से अच्छा है कि माँ स्वयं ही बच्चों का पालन पोषण करें। माँ ही काफ़ी है।

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