घर की मुर्गी दाल बराबर नहीं हूँ मैं!

 "वाह सोनिया कितनी खूबसूरत पेंटिंग्स हैं! तुमने पेंटिंग सीखी है क्या?"रीवा ने ड्राइंग रूम के बगल में ऊपर जाती सीढ़ियों पर लगी पेंटिंग्स देखकर पूछा

जब तक सोनिया कुछ बताती रीवा तो पेंटिंग्स के पास पहुंच चुकी थी।उन्हें बारीकी से निहार कर भूरि-भूरि प्रशंसा करने लगी।सोनिया बोली,"अरे ये पेंटिंग्स तो मम्मी ने बनाई थीं, उन्होंने अपने काॅलेज के दिनों में सीखा था।तुम कहां ये ओल्ड फैशन पेंटिंग्स को देखने में टाइम वेस्ट कर रही हों? मेरे रूम में चलते हैं, कुछ डिज़ाइनर आउटफिट खरीदें हैं चलकर देखो।फिर प्रोजेक्ट वर्क करेंगे।"

रीवा जैसे ही पीछे मुड़ी तो उसने देखा सोनिया की मम्मी श्वेता आंटी खड़ी थी।श्वेता सोनिया और रीवा के लिए स्ट्राबेरी शेक और सैंडविच लेकर आई थी।सोनिया की बातें सुनकर उसकी ऑ॑खों पनीली सी हो आईं,खारे पानी को नेत्रों में छुपाते हुए श्वेता ने कहा,"सोनिया बेटा,तुम्हारी दोस्त पहली बार घर आई है,कुछ खा पी लो फिर काम करना‌।"

"मम्मी, रूम में ले आना,हमें बहुत काम है।"सोनिया रीवा का हाथ पकड़कर जाने लगी रीवा ने सोनिया से कहा,"एक मिनट रुको सोनिया।"

फिर श्वेता से बोली,"नमस्ते आंटी, आपने बहुत अच्छी पेंटिंग्स बनाईं हैं।आप अपनी पेंटिंग्स की एक्जीबिशन लगाइए,सभी लोग आपकी कला की सराहना करेंगे।"

"बेटा,ये तो शादी से पहले का शौक था जो बाद में धूमिल होता चला गया।"श्वेता बोली

"आंटी,आप अभी भी वैसे ही बढ़िया पेंटिंग्स बना सकती हैं, कला सीखकर भूली नहीं जाती है, पुनः अभ्यास से जीवित हो जाती है।आप पेंटिंग क्लासेज़ भी ले सकती हैं।"रीवा ने कहा और श्वेता के हाथ से ट्रे लेकर सोनिया से बोली," चलो।"

सोनिया बोली,"मम्मी पहुंचा देंगी।"

"चलो भी,इतनी सी बात के लिए आंटी को परेशान क्यों करना?"

श्वेता ने मन में सोचा,"इतने बरस से मैं घर की मुर्गी दाल बराबर के समान थी।आज सोनिया की सहेली ने मेरे अंदर लुप्तप्राय हो गए आत्मविश्वास को जगा दिया है,अब मैं अपने लिए समय निकाल कर अपनी कला को निखार कर पेंटिंग्स की प्रदर्शनी भी लगाऊंगी और पेंटिंग क्लासेज़ भी खोलूंगी।"ऐसा सोचकर श्वेता पेंटिग बनाने के लिए आवश्यक वस्तुओं की लिस्ट बनाने लगी।

आज श्वेता ने अपने बरसों से खोए हुए आत्मविश्वास को पुन: पा लिया। अपने अंदर के कुछ न होने या कुछ न कर पाने के भय को जीत लिया। 

दोस्तों , आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी? बताइएगा ज़रूर। मुझे आशा है कि हममें से कई गृहणियाँ अपने को ढूंढ़कर स्वयं के भय को जीतकर अपने खोये हुए आत्मविश्वास को पाने की कोशिश अवश्य करेंगे। 

आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा।  

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