चलो आज हम वीरों को याद करें! - स्वतंत्रता दिवस कविता
| देशभक्ति से ओतप्रोत स्वतंत्रता दिवस पर कविता |
चलो आज हम वीरों को याद करें!
हिंदी कविता
चलो आज हम वीरों को याद करें,
उनके बलिदानों को नमन करें।
आओ चलें हम मशाल उठाएं,
बलिदान की गाथा जग में फैलाएं।
वीरता की ज्वाला दिल में जलाएं ,
शहादत के दीप मन में सजाएं।
धरती की ख़ुशबू लहू से महकी,
स्वतंत्रता की वाणी मुखर की।
आओ मिलकर प्रण ये दोहराएं ,
माँ के चरणों में शीश झुकाएं।
चलो आज हम वीरों को याद करें,
उनके बलिदानों को नमन करें।
मेरठ से जब हुँकार उठी थी ,
मंगल पांडे ने रणभेरी बजाई थी।
क्रांति की चिंगारी नभ तक गई थी,
दिल में आज़ादी की आग लगी थी।
चौक-चौराहों पर रण का शोर,
दिल में उमड़ता था गर्जन घोर।
आगे बढ़ते कदम न रुकते,
जनमन में बिजली सी चमकते।
चलो आज हम वीरों को याद करें,
उनके बलिदानों को नमन करें।
जज़्बा था देशभक्ति का मन में,
स्वप्न था आज़ादी का जीवन में।
लहर चली थी खेत-खलिहानों में,
जाग उठी थी चिंगारी किसानों में।
हर घर में गूँजती थी पुकार ,
हर गली में आज़ादी का त्यौहार।
युवा चले थे शपथ उठाकर,
देश बचाने हृदय सजाकर।
चलो आज हम वीरों को याद करें,
उनके बलिदानों को नमन करें।
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई,
जिन्होंने ग़ुलामी थी ठुकराई।
प्राणों की आहुति देकर भी,
स्वतंत्रता की ज्योति जलवाई।
रणभूमि में शौर्य लहराया,
शत्रु को हर कदम पछाड़ गिराया।
मातृभूमि की रक्षा की शपथ,
रानी ने निभाई अंतिम सांस तक।
चलो आज हम वीरों को याद करें,
उनके बलिदानों को नमन करें।
गाँधी ने अहिंसा की राह दिखाई,
दांडी यात्रा से ज्योति जगाई।
"भारत छोड़ो" का नारा देकर,
असहयोग से शक्ति दिखाई।
सत्याग्रह की मिसाल बनाई ,
दुश्मन की नींद उड़ा कर आई।
सत्य और करुणा को साथ रखा ,
अन्याय के विरुद्ध डटकर रखा।
चलो आज हम वीरों को याद करें,
उनके बलिदानों को नमन करें।
भगत, सुखदेव और राजगुरु,
हँसते-हँसते सूली पर चढ़ गए।
काकोरी के शूरवीर भी ,
जीवन अर्पित कर अमर हो गए।
देशभक्ति की गाथा लिखी,
आज़ादी की लौ सदा के लिए जगी।
माँ की माटी में मिल गए वीर,
रक्त से लिख गए स्वर्णिम नीर।
चलो आज हम वीरों को याद करें,
उनके बलिदानों को नमन करें।
चंद्रशेखर, बिस्मिल, अशफ़ाक़,
जिनके साहस की मिसाल नहीं।
देशभक्ति में जीवन लुटा गए ,
ऐसा बलिदान बेमिसाल सही।
गोलियों के बीच जान गंवाई,
स्वाभिमान की शपथ निभाई।
धरती माँ का मान बढ़
चलो आज हम वीरों को याद करें,
उनके बलिदानों को नमन करें।
ऊधम सिंह ने बदला पूरा किया,
डायर को लंदन में मार दिया।
"तुम मुझे ख़ून दो" की हुंकार,
नेताजी ने हर दिल में भर दिया।
वीर सुभाष रण में उतरे ,
अंग्रेज़ी साम्राज्य के स्वर फट पड़े।
आज़ाद हिंद का झंडा लहराया ,
दुश्मन को पीछे हटाया।
चलो आज हम वीरों को याद करें,
उनके बलिदानों को नमन करें।
देश के दीवाने न्योछावर हुए ,
माँ भारती का मान बचाया।
हम श्रद्धा से नमन करते हैं ,
जिन्होंने यह जीवन धन्य बनाया।
मिट्टी के खातिर लहू बहाया ,
स्वाभिमान का मोल चुकाया।
तूफ़ानों में भी कदम बढ़ाए ,
जंजीरों को तोड़ गिराए।
रक्त की बूँद वतन को अर्पण,
जन-मन में भर दी जीवन-किरण।
चलो आज हम वीरों को याद करें,
उनके बलिदानों को नमन करें।
१५ अगस्त, २०२५
-प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'(मौलिक व स्वरचित)
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✍️ लेखिका के बारे में
प्रियंका सक्सेना ‘जयपुरी’ समकालीन हिंदी साहित्य में सक्रिय लेखिका हैं। वे कविता, ग़ज़ल, कहानी तथा हिंदी साहित्य, संस्कृति, इतिहास और हिंदी व्याकरण से जुड़े विचारात्मक लेखन में रुचि रखती हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, मौन के अर्थ, प्रेम की नाज़ुकता, जीवन की क्षणभंगुरता और रिश्तों की जटिल भावनाएँ सूक्ष्मता से उभरती हैं।
पारंपरिक शिल्प को आधुनिक दृष्टि से जोड़ते हुए, वे शब्दों में सादगी और भावों में गहराई रचती हैं। उनकी रचनाओं में आत्मसंवाद, विरह और अस्तित्व के प्रश्न स्वाभाविक रूप से उभरते हैं, जो पाठक को भीतर तक छू जाते हैं।
“प्रियंका की कलम से” उनके साहित्यिक लेखन, ज्ञानवर्धक लेखों और भाव-अभिव्यक्ति का सजीव मंच है। वे अपने ब्लॉग के माध्यम से हिंदी साहित्य, संस्कृति, इतिहास और हिंदी व्याकरण से जुड़े विषयों को सरल और सारगर्भित रूप में पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास करती हैं।
अति सुंदर कविता। जय हिंद
जवाब देंहटाएंबहुत शुक्रिया आपका। जय हिन्द
हटाएं👍👍🙏
जवाब देंहटाएंthank you 💐
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