ये जो बुज़ुर्गों के बालों में चाँदी के तार चमक रहे हैं - कविता
ये जो बुज़ुर्गों के बालों में चाँदी के तार चमक रहे हैं
Buzurgon Par Kavita
हिंदी कविता
ये जो बुज़ुर्गों के बालों में चाँदी के तार चमक रहे हैं,
असल में उम्र के साथ मिले अनुभवों के ख़ज़ाने दमक रहे हैं।
हर झुर्री में छुपी है जीवन की अमूल्य सीख,
उनकी रोशनी से ही घर-आँगन के दीपक जगमगा रहे हैं।
बचपन में उँगली पकड़ कर हमें,
चलना सिखाया, संभलना सिखाया।
आँधियों में छाँव बनकर सदा रहे,
प्यार से जीना, धैर्य से रहना सिखाया।
अनुभव की थाती, आशीष का मान,
बुज़ुर्ग हमारे हैं जीवन की जान।
उनकी मुस्कान है दीपक की ज्योति,
उनके बिना जग लगता है दिया बिन बाती ।
ये जो बुज़ुर्गों के बालों में चाँदी के तार चमक रहे हैं,
असल में उम्र के साथ मिले अनुभवों के ख़ज़ाने दमक रहे हैं।
होंठों पर मुस्कान, आँखों में उजाला,
बड़े-बुजुर्गों का साथ है सबसे निराला।
अनुभव की छाँव, स्नेह की छवि,
बुजुर्गों से ही जीवन बने मधुर गाथा नवि।
संघर्ष के मौसम, धूप और छाँव,
बुजुर्गों ने ही सजाए हैं रिश्तों के गाँव।
आशीष उनका है सबसे बड़ा मान,
बुजुर्गों से मिलता है जीवन का ज्ञान।
ये जो बुज़ुर्गों के बालों में चाँदी के तार चमक रहे हैं,
असल में उम्र के साथ मिले अनुभवों के ख़ज़ाने दमक रहे हैं।
बुजर्गों ने हर मौसम-बेमौसम को जिया है ,
हर दुःख दर्द तकलीफ को हँसते हुए सहा है ।
उनकी हर लकीर में है कहानी छिपी,
त्याग और सेवा की है निशानी लिखी।
हर दुःख दर्द तकलीफ को हँसते हुए सहा है ।
उनकी हर लकीर में है कहानी छिपी,
त्याग और सेवा की है निशानी लिखी।
सफ़र के हर मोड़ पर सीखी हुई सच्चाइयाँ,
हँसी-ख़ुशी-आँसू में ढली हुई गहराइयाँ।
माथे की शिकन में छुपा है संघर्ष का इतिहास,
हर मुस्कान में फैला है जीवन का उजास ।
ये जो बुज़ुर्गों के बालों में चाँदी के तार चमक रहे हैं,
असल में उम्र के साथ मिले अनुभवों के ख़ज़ाने दमक रहे हैं।
उनकी दुआओं में बरसती है ठंडी छाँव,
उनके कदमों में मिलता है सुकून-ऐ -गाँव।
समय ने तराशा, निखरे हीरा बनकर,
परिवार को सजाया, उजियारा बनकर।
उनकी कहानियों में छुपा है ज़माने का रंग,
उनकी सीख से सँवरता, बनता जीवन अभिरंग।
हर शब्द उनका बन जाता है जीवन का आधार ,
हर आशीष से उनके मिलती है शक्ति अपार।
ये जो बुज़ुर्गों के बालों में चाँदी के तार चमक रहे हैं,
असल में उम्र के साथ मिले अनुभवों के ख़ज़ाने दमक रहे हैं।
चलो हम भी उस रोशनी को पहचानें,
उनके अनुभवों से जीवन को सजाएँ।
चाँदी के तार नहीं, रोशनी के सितारे हैं वो,
हमारी धरोहर, हमारे सहारे हैं वो।
थाम लो रिश्तों की ये अमानत प्यारी,
इनसे ही तो है हर खुशी हमारी।
बुज़ुर्ग हैं तो आँगन में बसंत रहता है,
उनके होने से हर घर जीवंत रहता है।
ये जो बुज़ुर्गों के बालों में चाँदी के तार चमक रहे हैं,
असल में उम्र के साथ मिले अनुभवों के ख़ज़ाने दमक रहे हैं।
घर की धुरी वो, संस्कारों की नींव रख गए,
कर्तव्य निभाने की राह दिखा गए।
वक्त की आँधी भी उनको झुका ना सकी,
उनकी हिम्मत ने हर मुश्किल को दिशा दी।
आशीर्वाद उनका है सबसे बड़ा मान,
बुज़ुर्गों से मिलता है जीवन का सम्मान।
उनके बिना, ना कोई हमारी पहचान,
बुजुर्ग हैं पोथी संस्कार के, प्रदान करते अमूल्य ज्ञान।
ये जो बुज़ुर्गों के बालों में चाँदी के तार चमक रहे हैं,
असल में उम्र के साथ मिले अनुभवों के ख़ज़ाने दमक रहे हैं।
त्याग, बड़प्पन और धैर्य की मिसाल हैं वो,
सार्थक जीवन का प्रतीक, हाँ कमाल हैं वो।
संग उनके बीते लम्हे बनते अमर गीत,
उनकी कथाओ में वर्णित होता सुनहरा अतीत।
उनकी छाया में रिश्ते खिलखिलाते हैं,
उनके होने से घर-आँगन महक जाते हैं।
सम्मान उनका ही सबसे बड़ा गहना है,
बुज़ुर्गों से ही घर का कोना-कोना सोना है।
ये जो बुज़ुर्गों के बालों में चाँदी के तार चमक रहे हैं,
असल में उम्र के साथ मिले अनुभवों के ख़ज़ाने दमक रहे हैं।
उनके चरणों में बसता है सारा संसार,
उनकी छाया से जीवन होता है खुशगवार।
उनकी छाया से जीवन होता है खुशगवार।
उनकी दुआओं में मिलता है दिली सुकून,
उनके होने से महकता है हर दिसंबर और जून।
आओ मिलकर प्रण ये सभी करें,
आदर सम्मान सदा उनको हम दें।
उनकी सीख है जीवन की अमूल्य निधि,
उनके अनुभव हैं युगों तक की सिद्धि।
आदर सम्मान सदा उनको हम दें।
उनकी सीख है जीवन की अमूल्य निधि,
उनके अनुभव हैं युगों तक की सिद्धि।
ये जो बुज़ुर्गों के बालों में चाँदी के तार चमक रहे हैं जयपुरी
असल में उम्र के साथ मिले अनुभवों के ख़ज़ाने दमक रहे हैं।
-प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'
(मौलिक व स्वरचित)
२१ अगस्त, २०२५
लेखिका की कलम से
दोस्तों,
इस कविता की शुरु की दो पंक्तियाँ २०२१ में लिखी थी मैंने -ये जो बुजुर्गों के बालों में चाँदी के तार चमक रहे हैं, उम्र के साथ मिले अनुभवों का खज़ाना हैं। और धीरे-धीरे लिखते २१ अगस्त २०२५ को मैंने यह कविता अपने बुज़ुर्गों के लिए पूर्ण की है। २१ अगस्त को विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस भी मनाया जाता है। मुझे अत्यंत हर्ष है कि मैंने यह कविता २१ अगस्त को लिखी। मुझे आशा ही नहीं, विश्वास है कि यह कविता आपके दिलों को झंकृत कर जाएगी। भावनाओं से ओत प्रोत मेरी अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप मुझे फाॅलो करना न भूलें।धन्यवाद 🙏 आभारप्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'
ये जो बुजुर्गों के बालों में चाँदी के तार चमक रहे हैं,
उम्र के साथ मिले अनुभवों का खज़ाना हैं।

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