चाँद : जीवन का सखा - दोहे की माला
साहित्य के आँगन में जब भी चाँदनी उतरती है, वह केवल आसमान का नहीं, हमारे मन का भी आईना बन जाती है।
कभी चाँद ममतामय मामा है, कभी विरह का साक्षी, कभी प्रेम का साथी और कभी वीरों की वीरता का गवाह।
आज मैं आपके सामने चाँद के इन्हीं रूपों को दोहों की माला में पिरोकर प्रस्तुत कर रही हूँ –
चाँद : जीवन का सखा
दोहे की माला
चाँदनी तज शीतलता, ऊष्ण हुई कुछ आज।
साक्षी बन चंद्र देखता, मिलन-विछोह समाज॥
करवा चौथ की रात में, प्रेम पिया का खरा।
नयनों से राह तके , व्रती सजनी धरा॥
शीघ्र कदम पति बढ़ाए, सजनी का है मान।
संग शशि श्रद्धा प्रबल, देख भर भर मुस्कान॥
नववधू के घूँघट तले, मुस्काती पहली रात।
चाँद बना साक्षी वहाँ, मधुर मिलन की बात॥
प्रेमी युगल मिलन में, रखता मन का राग।
चाँदनी की झिलमिल से, बढ़े हृदय अनुराग॥
सैनिक जब घर से चला, माँ के पग पखार।
चाँद गवाह बना वहाँ, नम थीं दोनों धार॥
सीमा पर तैनात वीर, छोड़ चुका घर गाँव।
अर्धांगिनी की पीर का, चाँद रहा पर्याय॥
जागी आँखें रात भर, विरहिणी की है आस ।
चाँद खड़ा संग देखता, उसके मन का त्रास॥
अधरों पर मुस्कान जब, नयनों में हो नीर।
चाँद बना समवेदना, बाँटे सुख दुःख गंभीर॥
शिशु झुले सपनों तले, देखे परी-कथा ।
चाँद बना प्रिय चंदा-मामा, सुनाए अद्भुत गाथा॥
लोरी गाती माँ कहे, चंदा मामा आओ।
नींद की नाव सवार कर , नन्हें को सुलाओ॥
झूला झूलें चाँद पर, तारे करें उजियार।
माँ की गोदी स्वर्ग-सी, लोरी सुख अपार॥
हल की नोक चमक उठी, श्रम का गान सुनाय।
चाँदनी संग खेत में, उम्मीदों की फसल उगाय॥
कृषक खेत में बो रहा, बीजों में विश्वास।
चाँदनी संग झूमती, फसलें करें उल्लास॥
रात अंधेरी जब घिरे, भय बढ़ जाए अपार।
चाँद दिया बन सामने, करता जग उजियार॥
यात्री थका बीच राह में, देखे ऊपर चाँद।
आशा की किरण बने, देता नयी पहचान॥
पथिक अंधियारे में फँसा, राह न जाने कोय ।
चाँद दिखाए पथ नया, साथी बना न खोय॥
समुद्रों में ज्वार प्रचंड, उठता जब आधी रात।
चाँद खींचता शक्ति से, रचता अनोखी बात॥
जीवन के उतार में, सुख-दुख संग निभाए।
चाँद रहा हर मोड़ पर, सखा सदा कहलाए॥
प्यासी धरती पी रही, किरणों का मधुपान।
चाँद बना जीवन हेतु, जैसे ब्रह्म विधान॥
शीतलता हर ओर दे, बाँटे अमृत धारा।
चाँदनी से जग झलकता, असीम दिव्य सहारा॥
जीवन के हर मोड़ पर, चाँद सखा निरंतर।
अनादि-अनंत अमर बना, ज्योतिर्मय सुधाकर॥
चाँद बना मन की कलम, देता रस मधुर ॥
'जयपुरी' को प्रेरित कर, लिखे भाव प्रचुर।
-प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'
(मौलिक व स्वरचित)
३० अगस्त, २०२५
लेखिका की कलम से
दोस्तों,यह चाँद यूँ ही युगों-युगों से हमारे सुख-दुख का साथी रहा है। कभी प्रेम की मीठी रातों में मुस्कुराता है, कभी विरहणी की बहती आँखों का सहारा बनता है तो कभी माँ की लोरी में झिलमिलाता है, कभी सीमा पर शहीद की याद में आँसूओं का गवाह बनता है। वह न केवल आकाश का चाँद है, बल्कि हमारे जीवन का भी सखा है।
इसी भाव के साथ मैं अपनी यह दोहे-माला यहीं पूर्ण करती हूँ।
भावनाओं से ओत प्रोत मेरी अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप मुझे फाॅलो करना न भूलें।
धन्यवाद 🙏 आभारप्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'
यह चाँद यूँ ही युगों-युगों से हमारे सुख-दुख का साथी रहा है। कभी प्रेम की मीठी रातों में मुस्कुराता है, कभी विरहणी की बहती आँखों का सहारा बनता है तो कभी माँ की लोरी में झिलमिलाता है, कभी सीमा पर शहीद की याद में आँसूओं का गवाह बनता है। वह न केवल आकाश का चाँद है, बल्कि हमारे जीवन का भी सखा है।
इसी भाव के साथ मैं अपनी यह दोहे-माला यहीं पूर्ण करती हूँ।
भावनाओं से ओत प्रोत मेरी अन्य रचनाओं को पढ़ने के लिए आप मुझे फाॅलो करना न भूलें।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें