दिल से लिखती हूँ - कविता

Dil se likhti hoon kavita pic


दिल से लिखती हूँ!

हिंदी कविता 

दिल से लिखती हूँ,

मन को खोलकर रख देती हूँ।

दिल की बातों को

बिना दिखावा लिखती हूँ।

मन को जो भाए,

ऐसा गीत लिखती हूँ।

कलम जब उठती है,

तो अपना पराया ना देखती है।

वो तो प्रकृति के कण-कण में

संगीत ढूंढ लेती है।

भावों को, वेदना को,

दर्दों को, दवाओं को,

कल्पना को, हकीकत को,

मिश्रित भावनाओं को

कागज़ पर उतारती हूँ।

प्यार को, विरह को,

जज़्बातों को, ठहराव को,

बहती हुई धारा को,

पत्थर पर पड़ते पानी को

देती हूँ स्थायी का प्रारूप।

बाँधती हूँ शब्दों को,

चुन-चुनकर अक्षरों को,

आंचल में लगाकर

इक छोटी सी गांठ प्रेम की।

काली अंधेरी रात में

जगमगाते जुगनुओं की तरह

तब कविता दिलों के 

पार जाकर मुस्कान खिला जाती है।

-प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'
(मौलिक व स्वरचित)

२५  सितंबर, २०२५  

लेखिका की कलम से 

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धन्यवाद 
🙏 आभार

प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'

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