गोपाल काडेकोडी सर के जन्मदिवस पर कविता
आज शिक्षक दिवस है, मैं अपनी कुछ पंक्तियाँ समर्पित कर रही हूँ आदरणीय गोपाल के. काडेकोडी सर को, जो ना केवल एक महान अर्थशास्त्री और समाज-विज्ञानी हैं, बल्कि एक सच्चे मार्गदर्शक, गुरु और प्रेरणा भी रहे हैं।आपने अपने शोध, कार्य और समर्पण से केवल संस्थानों को ही नहीं, बल्कि पीढ़ियों को नई दृष्टिऔर विचार दिए। आपका योगदान समाज, पर्यावरण और शिक्षा —हर क्षेत्र में अमूल्य रहा है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि आप स्वस्थ, सक्रिय और प्रेरणादायी बने रहें।
Gopal K Kadekodi Sir
ज्ञान के पथिक को नमन
हिंदी कविता
84 वसंत पार कर, अब भी वही तेज झलकता है,
ज्ञान का दीपक आपके संग, हर मन में दमकता है।
संख्याओं से समाज तक, हर विषय को साधा है,
हर शोध में आपने जीवन का संदेश बाँधा है।
शब्दों में गहराई आपकी, विचारों में सागर है,
हर प्रश्न का उत्तर जैसे, आपके पास धरोहर है।
पर्यावरण की धरती को, संवेदना से जोड़ा है,
संतुलन और विकास का, सुंदर सपना बोया है।
गुरु बने आप जीवन के, सिर्फ किताबों में ही नहीं,
हर अनुभव में सीख मिली, हर पड़ाव पे कमी रही ना कभी।
विद्यार्थी ही नहीं, सहकर्मी भी आपसे सीखते हैं,
आपकी दृष्टि से चलते-चलते, सब नित आगे बढ़ते हैं।
शोध से जीवन तक, आपने राह दिखलाई,
हर पीढ़ी को अपने चिंतन से, नई दृष्टि सिखलाई।
इंस्टीट्यूट के गलियारों में गूँजती थी आपकी वाणी,
अनुभव की धारा में बहती तब शिक्षा की कहानी।
UNDP प्रोजेक्ट में आपके सानिध्य में कार्य करने का अवसर मिला,
Common Property Resources का तब सपना खिला।
NGO SHRMS के लिए सॉफ़्टवेयर निर्माण हेतु आपसे मैं जुड़ी,
असलम संग कार्य करते हुए हर कदम पर ज्ञान की ज्योति जली।
सेवा का जज़्बा अब भी वही, उम्र ने रोका नहीं,
84 की यात्रा में भी आपका उत्साह खोया नहीं।
सम्मानित हैं आप हर दिल में, हर शोधक की वाणी में,
ज्ञान की गंगा बहती जाती, आपकी अनवरत कहानी में।
सादगी से सज्जित जीवन, अनुशासन की डोर है,
आपके संग बिताया पल, हर किसी के लिए अनमोल है।
आपका आशीर्वाद ही सबसे बड़ा उपहार है,
सर, आपकी प्रदत्त शिक्षा ही जीवन का सार है।
गुरु, मित्र और प्रेरणा, सबका संग संभाला है,
सादगी और समर्पण से जीवन को निखारा है।
आपके आशीष से ही हमको आगे बढ़ना है,
जन्मदिवस पर यही दुआ — सदा आपको स्वस्थ रहना है।
🙏🌸
आदर सहित —
प्रियंका सक्सेना
(मौलिक व स्वरचित)

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