जीवन के हर मोड़ पर शिक्षक - कविता
आज शिक्षक दिवस पर मैं उन सभी गुरुओं को नमन करती हूँ, जिन्होंने मेरे जीवन को सँवारा —
चाहे वो मेरी दिवंगत माँ हों, मेरे प्रिय पापा हों, शिक्षक हों, मित्र हों , भाई-बहन-पति-बच्चे हों
या स्वयं प्रकृति और समय।
जीवन के हर मोड़ पर शिक्षक
हिंदी कविता
शिक्षक हैं जीवन की सच्ची पाठशाला,
अज्ञान हरकर भरते ज्ञान का उजाला।
संस्कार देकर दिखाते सही राह सदा,
उनकी छाया में खिलता है जग सारा।
चरणों में जिनके मिलता सच्चा सम्मान,
शिक्षक ही मानवता का होता प्रथम प्रमाण।
शिक्षा होती पूर्ण ,करते हैं हम गुरुवंदन
जीवन के गुरु अमूल्य, गुरुवर आपको नमन।
माँ ने दी ममता, पिता ने दिए संस्कार,
गुरु ने सजाया जीवन का हर द्वार।
तीनों के संग से जीवन बनता उज्ज्वल,
इनके सानिध्य में मिलता सच्चा संबल।
माँ की गोद ममत्व ने पहला सबक सिखाया,
पिता की समझाइश ने हौंसला बढ़ाया।
लोरी में संस्कार, थपकी में प्यार,
घर ही बना शिक्षा का पहला द्वार।
माँ की लोरी में छिपी थी परवाह,
आँचल में पिघलता था हर एक ग़म हर आह।
पिता की डाँट में छुपा था सहारा,
“गिरो तो उठो” कहता उनका इशारा।
भाई की शरारत, बहन की दुआ,
सिखाती रही रिश्तों की सच्ची वफ़ा।
भाई-बहन सिखाते हैं बाँटना-संवारना,
नोकझोंक में रिश्तों को फिर से निखारना।
दोस्त बताते हैं गिरकर भी संभलना,
अंधेरों में दीप-सा उम्मीद की जलना।
दोस्तों की हँसी, आंसुओं के पल,
सिखा जाते जीवन में कैसे रहना सफल।
सीनियर्स दिखाते हैं अनुभव का मोल,
सहकर्मी सिखाते हैं मिल-जुलकर बोल।
हर मिलने वाला इंसान अनजाना,
कुछ न कुछ दे जाता है खजाना।
पति/पत्नी का साथ सिखाता है धैर्य और विश्वास,
कठिन राह में देता है हिम्मत का आभास।
संग-साथ से जीवन की राहें सँवर जाती,
छोटे-छोटे क्षण भी सीख मधुर बन जाती।
बच्चों की मासूमियत सिखाती सच्चा प्यार,
उनकी हँसी में छिपा है जीवन का आधार।
नन्हें प्रश्न जगाते हैं सोच की नई राह,
उनसे ही सीखता मन – सरलता की चाह।
किसान की मेहनत, मजदूर का पसीना,
सिखाते हैं श्रम का सच्चा नगीना।
सत्य सिखाता है सीधी राह पर चलना,
धैर्य बताता है हर कठिनाई को हल करना।
प्रकृति है सबसे बड़ी पाठशाला,
चाँद सिखाए — अंधियारे में बनो उजाला।
सूरज कहे — परिश्रम से मत डरना कभी,
नदी बहकर कहती — मत थमना कभी।
पर्वत पुकारे — दृढ़ रहो हर घड़ी,
हवा तो जीवन का आधार है सभी।
वृक्ष बताए — छाँव दया की फैलाओ,
जीवन में हरदम मानवता अपनाओ।
हार भी शिक्षक है—सिखा देती है जीत,
आँसू भी कहते हैं — मुस्कान है प्रीत।
समय का पहिया समझाता है आगे ही बढ़ना,
हर पल को साधो, यही है जीवन को गढ़ना।
इसलिए झुकता है मेरा मन बार-बार,
हर गुरु को करती हूँ शत-शत नमस्कार।
माँ, पिता, मित्र, शिक्षक, प्रकृति या समय,
सबसे सीखी शिक्षा, हैं जीवन के आयाम।
गुरु केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहते,
हर रिश्ता, हर पल हमें कुछ नया कहते।
शिक्षा की अमर धारा को 'जयपुरी' का नमन बारंबार,
गुरुओं के चरणों में ही है, जीवन का सच्चा संसार।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें