उम्मीद पर दुनिया कायम है - लघु कथा

उम्मीद पर दुनिया कायम है!

हिंदी हास्य लघु कथा 

"भैया,सुबह-सुबह कहां जा रहे हों?" माला ने राहुल को तैयार देख पूछा 

राहुल डीओ स्प्रे करता हुआ," बड़ी भाभी के यहां जाकर आता हूँ।"

माला छेड़ते हुए, "भाभी की छोटी बहन आई है तभी हर दिन चक्कर लगाने जाते हों! बाद में हों आना, पहले कुछ सब्जी ला दो भैया।"

"बस मैं ये गया, वो आया।" 

राहुल पलक झपकते चचेरी भाभी के घर पहुॅ॑च गया। 

भाभी देखते ही, "बड़े मौके से आए हो, कमर कस कर तैयार होजाओ,भैयाजी!"

राहुल खुश कि इतनी पूछ! वाह! भई वाह! मन में लड्डू फूटने लगे कहीं भाभी, माॅ॑ से बात तो नहीं चलाने वाली हैं!

भाभी, "भैयाजी,पानी-वानी पी लो।सिर पर पगड़ी भी बांध लो।"

अब तो राहुल का दिल उछलकर बाहर आने को आतुर हो उठा। 

उसने पूछा, "माज़रा क्या है,भाभी?"

भाभी, "बस जंग की तैयारी है,भैयाजी।"

शादी भी एक जंग है,राहुल का दिल बल्लियों उछलने लगा। कान बस अब सुनने को बेताब हो उठे कि सारे हवाई किले ध्वस्त करती भाभी की आवाज आई, "भैयाजी, ये लो जाला झाड़ने वाला डंडा और शुरू हो जाओ। झाड़ू-झाड़न-स्टूल सब लगा दिया है।"

बस फिर क्या था दिवाली की सफाई शुरू कर दी, देवर जी ने भाभी जी के लिए...अरे भई,उम्मीद पर दुनिया कायम है!

-प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'

(मौलिक व स्वरचित)

२५  सितंबर, २०२५  

लेखिका की कलम से 

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धन्यवाद 
🙏 आभार

प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'

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