गणतंत्र दिवस 26 जनवरी पर देशभक्ति कविता | आओ गणतंत्र दिवस मनाएँ

आओ गणतंत्र दिवस मनाएँ

26 जनवरी गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर प्रस्तुत यह ओजस्वी और भावपूर्ण देशभक्ति कविता भारत के वीर शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं को समर्पित है। यह कविता 1947 में मिली आज़ादी से लेकर 26 जनवरी 1950 को लागू हुए भारतीय संविधान तक की गौरवशाली यात्रा को सशक्त शब्दों में दर्शाती है। इसमें गणतंत्र की महत्ता, लोकतंत्र की शक्ति, राष्ट्रीय एकता, अखंडता और देशप्रेम की भावना को प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया है। कविता में राजपथ की परेड, तिरंगे का सम्मान, राष्ट्रगान की गूँज और भारत की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत चित्रण किया गया है। गणतंत्र दिवस पर पढ़ी जाने वाली यह कविता हर भारतीय के मन में गर्व, प्रेरणा और देशभक्ति की भावना जागृत करती है।

हिंदी कविता

आओ गणतंत्र दिवस मनाएँ,
वीरों की स्मृतियाँ मन में सजाएँ।
देश पर जो कुर्बान हुए हैं,
उन अमर सपूतों को शीश झुकाएँ।

क्रांतिकारियों के बलिदानों का,
नमन करें हम बारम्बार,
स्वतंत्रता सेनानियों की गाथा से,
जगमग हो उठे मन का संसार।

वतन पे जिसने जान लुटाई,
उनकी वीरता को नमन हमारा,
शहीदों की याद में श्रद्धा सुमन,
अर्पित करता भारत सारा।

आओ गणतंत्र दिवस मनाएँ,
पूर्ण गणतंत्र का पर्व सजाएँ।
संविधान लागू होने का दिन है,
इस गौरव को हृदय में बसाएँ।

उन्नीस सौ सैंतालीस में टूटीं बेड़ियाँ,
पर राष्ट्र-रचना थी शेष,
छब्बीस जनवरी उन्नीस सौ पचास को,
संविधान से हुआ भारत विशेष। 

हमें मिला अधिकारों का आधार,
कर्तव्यों का पावन संगम,
भारत बना गणतंत्र महान,
लोकतंत्र को अनुपम प्रणाम।

आज हर्षोल्लास से देश मनाता,
उत्सव जैसा हर क्षण लगता है,
राजपथ पर जब परेड सजे,
शौर्य का दृश्य झलकता है।

राष्ट्रपति तिरंगा फहराते,
आन-बान-शान की पहचान,
राष्ट्रगान की गूँज संग,
नतमस्तक होता हर अभिमान।

सेना का शक्ति प्रदर्शन देख,
दुश्मन की रूह तक काँपे,
देशप्रेमियों का उत्साह बढ़े,
भारत की छवि नभ को नापे।

हर प्रांत, हर प्रदेश की झाँकी,
संस्कृति का रंग दिखाती है,
लोककला, परंपरा, विविधता,
भारत की आत्मा झलकाती है।

विद्यालयों में उत्सव होता,
बच्चों में जोश समाता है,
गणतंत्र का अर्थ सरल बनकर,
हर मन तक पहुँच जाता है।

भारत विश्व की मिसाल बना।
जनता का, जनता के लिए, 
जनता के द्वारा शासन,
लोकतंत्र का उज्ज्वल सपना।

विशाल संविधान है हमारा,
गर्वित आन, पहचान अपार,
लोकतंत्र का उज्ज्वल स्वप्न,
जिस पर है हम सबको अभिमान।

गणतंत्र हमारा, देश हमारा,
लोकतांत्रिक भारत महान,
जान से भी बढ़कर प्यारी हमें,
देश की एकता, अखंडता, सम्मान।

आओ गणतंत्र दिवस मनाएँ,
लोकतंत्र का उत्सव गाएँ।
मर्यादा इसकी बनाए रखें,
देश को सबसे ऊपर रखें।

आओ गणतंत्र दिवस मनाएँ,
लोकतंत्र का पालन करें,
ऐसा प्रण आज हम सब लें,
भारत माँ का मान बढ़ाएँ।

जय हिंद! जय भारत!
वंदे मातरम्!

✍️ लेखिका के बारे में

प्रियंका सक्सेना ‘जयपुरी’ समकालीन हिंदी साहित्य में सक्रिय लेखिका हैं। वे कविता, ग़ज़ल, कहानी और विचारात्मक लेखन में रुचि रखती हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, मौन के अर्थ, प्रेम की नाज़ुकता, जीवन की क्षणभंगुरता और रिश्तों की जटिल भावनाएँ सूक्ष्मता से उभरती हैं। पारंपरिक शिल्प को आधुनिक दृष्टि से जोड़ते हुए, वे शब्दों में सादगी और भावों में गहराई रचती हैं। उनकी रचनाओं में आत्मसंवाद, विरह और अस्तित्व के प्रश्न स्वाभाविक रूप से उभरते हैं, जो पाठक को भीतर तक छू जाते हैं।

“प्रियंका की कलम से” उनके साहित्यिक लेखन और भाव-अभिव्यक्ति का सजीव मंच है।

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