मोतीचूर के लड्डू रेसिपी | हलवाई जैसे लड्डू घर पर | रेसिपी हिंदी में
मोतीचूर का लड्डू रेसिपी
मोतीचूर के लड्डू महीन बूंदी से बनी एक बेहद स्वादिष्ट और लोकप्रिय भारतीय मिठाई हैं। यह एक ऐसा मीठा पकवान है, जिसमें बेसन की छोटी-छोटी बूँदों को घी में तलकर बूंदी बनाते है , फिर बूंदी को सुगंधित चीनी की चाशनी में पाग कर गोल-गोल लड्डू का आकार दिया जाता है। नन्हे-नन्हे बूंदी से बने ये लड्डू मुँह में रखते ही घुल जाते हैं और दिल तक मिठास पहुँचा देते हैं।
मोतीचूर के लड्डू भारत की परंपरागत मिठाइयों में एक खास स्थान रखते हैं। चाहे खुशी का कोई अवसर हो, कोई त्योहार, विवाह या पूजा-पर्व, सबसे पहले जिस मिठाई का नाम ज़ुबान पर आता है- वो है मोतीचूर के लड्डू । गणेश भगवान जी प्रथम पूज्यनीय हैं और गणपति बप्पामोतीचूर के लड्डुओं का भोग अत्यंत प्रिय है।
मोतीचूर के लड्डू रेसिपी
मोतीचूर का शाब्दिक अर्थ होता है-'मोती चूर कर पड़े हुए'। वास्तव में, इन लड्डुओं को बनाने में महीन बूंदी रूपी मोतियों को आपस में बाँधकर एक सुंदर और स्वादिष्ट लड्डू का रूप दिया जाता है।
🧺 सामग्री
बूंदी के लिए:
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बेसन (मोटा): 1 कप
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केसर फूड कलर: 1 चुटकी
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घी: 1 छोटा चम्मच
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पानी: 235 मिली
चाशनी के लिए:
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चीनी: 180 ग्राम
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पानी: 90 मिली
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नींबू का रस: 1–2 बूँद
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केसर फूड कलर: 1 चुटकी
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गुलाब जल: ¼ छोटा चम्मच
अन्य:
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घी: तलने के लिए (डीप फ्राइंग)
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छोटी इलायची पाउडर: ¼ छोटी चम्मच
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खरबूजे के बीज: 2 छोटे चम्मच
👩🍳मोतीचूर के लड्डू बनाने की आसान स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी
स्टेप 1: बूंदी का घोल तैयार करें
- एक बर्तन में बेसन लें, उसमें केसर फूड कलर और घी डालकर अच्छे से मिलाएँ। अब धीरे-धीरे पानी मिलाते हुए फेंटें। ध्यान रखें कि कोई गुठली या ढेला ना रहे।
- घोल बहुत पतला होना चाहिए। लगभग 200 मिली पानी मिलाने के बाद इसे 15–20 मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि बेसन अच्छे से फूल जाए।
- अब बचा हुआ 35 मिली पानी भी मिलाकर घोल को एकसार कर लें।
स्टेप 2: महीन बूंदी बनाएँ
- अब बहुत बारीक छेदों वाला झारा या कलछली लें। कढ़ाही में घी अच्छी तरह गरम करें।
- तेज़ गरम घी में झारे के ऊपर से घोल डालते हुए बूंदी गिराएँ। बूंदी डालते ही दूसरे झारे की मदद से तुरंत निकाल लें।
- निकाली हुई बूंदी को छलनी में रखें ताकि अतिरिक्त घी निकल जाए। 15–20 मिनट तक तक ऐसे ही रखें, थोड़ा ठंडा होने दें।
इस बीच में चाशनी बना लें।
स्टेप 3: चाशनी तैयार करें
- एक पैन में चीनी और पानी डालकर गैस पर रखें। उसमें केसर फूड कलर, गुलाब जल और नींबू का रस डालें। चीनी घुलने तक पकाएँ।
- एक उबाल आते ही गैस बंद कर दें।
स्टेप 4: बूंदी और चाशनी मिलाएँ
- चाशनी उतारते ही उसमें बूंदी डाल दें और धीमी आँच पर 2–4 मिनट पकाएँ।
- जब मिश्रण ना ज़्यादा गाढ़ा और ना ज़्यादा ढीला रहे और कढ़ाही के किनारे छोड़ने लगे तो समझिए यह तैयार है। आंच से उतार लें। इसमें तकरीबन 2-4 मिनट लगेंगे।
स्टेप 5: लड्डू बाँधें
- मिश्रण को 5 मिनट ढककर रखें। फिर एक थाली में फैलाकर उसमें खरबूजे के बीज और कुटा इलायची पाउडर मिला दें।
- हल्का ठंडा होने पर हाथों में घी लगाकर लड्डू बाँध लें।
स्टेप 6: परफेक्ट स्वाद का इंतज़ार
मोतीचूर के लड्डू तैयार हैं। लेकिन जरा ठहरिए, आप इन्हें चार-पांच घंटे के बाद ही खाइए। इतने समय में बूंदी में चाशनी अच्छी तरह भर जाती है और लड्डू मुँह में रखते ही घुल जाते हैं।
📝 महत्वपूर्ण नोट्स
मोतीचूर के लड्डू की बूंदी बहुत महीन बनाई जाती है इसलिए झारे या कलछली के छेद बारीक होने चाहिए।
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बेसन का घोल पतला रखें, सही अनुपात बहुत ज़रूरी है। अनुपात विधि के हिसाब से लें।
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घी तेज़ गरम होना चाहिए और बूंदी डालते ही निकालनी है।
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कम पकी बूंदी से कच्चे बेसन का स्वाद आएगा, ज्यादा पकी होने पर लड्डू सख्त बनेंगे।
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लड्डू कुछ घंटे बाद खाने पर सबसे स्वादिष्ट लगते हैं।
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इस रेसिपी से लगभग 16–20 मध्यम आकार के लड्डू बनते हैं।
🍽️ लेखिका के रसोड़े से
प्रियंका सक्सेना ‘जयपुरी’ को पारंपरिक भारतीय व्यंजनों और घरेलू स्वादों से गहरा लगाव है। उनके लिए रसोई केवल खाना बनाने की जगह नहीं बल्कि स्मृतियों, परंपराओं और अपनत्व से भरी एक संवेदनशील दुनिया है। वे सरल, भरोसेमंद और घर पर आसानी से बनने वाली रेसिपी साझा करती हैं जिनमें स्वाद के साथ-साथ अनुभव और भावना भी जुड़ी होती है।
“प्रियंका के रसोड़े से” के माध्यम से वे पारंपरिक रसोई ज्ञान को आज की ज़रूरतों के अनुसार प्रस्तुत करती हैं ताकि हर पाठक अपने घर में वही सादगी और स्वाद दोहरा सके।



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