नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती | पराक्रम दिवस पर राष्ट्रभक्ति कविता
पराक्रम दिवस
हिंदी कविता
आओ पराक्रम दिवस मनाएँ, नेताजी को हृदय से याद करें।
तिरंगे को शीश नवाएँ हम, देश के वीरों को नमन करें।
जयंती है हमारे प्रिय नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आज,
आओ उनके विचारों से भर दें मन में नव उजास।
जन्म लिया उस ज्वाला ने ,नाम था जिसका नेताजी सुभाष महान,
भय को जिसने तोड़ दिया, बदला था जिसने इतिहास का विधान!
जन-जन में देशभक्ति की आग उन्होंने जला डाली,
हर हृदय में स्वाभिमान की चिंगारी उन्होंने लगा डाली!
अन्याय कभी न सहें हम, गलत से समझौता न करें,
पुरज़ोर विरोध करें हरदम, डरें नहीं, निर्भीक बनें।
आज़ादी दी नहीं जाती, ली जाती है, उद्घोष उन्होंने बोला था,
जन-जन के मन में साहस का बीज, उन्होंने ही रोपा था।
“तुम मुझे खून दो” कहकर, “मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा!” पुकारा था,
इस एक हुंकार से नेताजी ने कहकर जन जन में जोश जगाया था।
रक्त-रक्त को पुकार रहा है, समय व्यर्थ के लिए नहीं,
कहकर देशवासियों को तब नेताजी ने झकझोरा था।
राष्ट्रवाद की परिभाषा से देश को सुंदर आकार दिया,
सत्य, शिव और मानवता को राष्ट्र का आधार बना दिया।
“जय हिन्द!” का नारा देकर, “दिल्ली चलो!” का शंखनाद किया,
समस्त ब्रिटिश साम्राज्य को तब अपना पराक्रम दिखाया था।
जन-जन में देशभक्ति की ज्वाला आपने जगा डाली थी,
अपने ओजस्वी नारों से सोई चेतना जगा डाली थी।
हे वीर! मातृभूमि के लिए जीवन सारा वार दिया,
नेताजी, नमन आपको, आपने भारत को स्वाभिमान दिया।
तो आओ!
आज संकल्प यह दोहराएँ, डर को कभी पास न आने दें,
नेताजी के सपनों का भारत, हम मिलकर साकार बनाएँ!
जय हिन्द!
भारत माता की जय!
२३ जनवरी, २०२४-प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'(मौलिक व स्वरचित)
✍️ लेखिका के बारे में
प्रियंका सक्सेना ‘जयपुरी’ समकालीन हिंदी साहित्य में सक्रिय लेखिका हैं। वे कविता, ग़ज़ल, कहानी और विचारात्मक लेखन में रुचि रखती हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, मौन के अर्थ, प्रेम की नाज़ुकता, जीवन की क्षणभंगुरता और रिश्तों की जटिल भावनाएँ सूक्ष्मता से उभरती हैं। पारंपरिक शिल्प को आधुनिक दृष्टि से जोड़ते हुए, वे शब्दों में सादगी और भावों में गहराई रचती हैं। उनकी रचनाओं में आत्मसंवाद, विरह और अस्तित्व के प्रश्न स्वाभाविक रूप से उभरते हैं, जो पाठक को भीतर तक छू जाते हैं।
प्रियंका सक्सेना ‘जयपुरी’ समकालीन हिंदी साहित्य में सक्रिय लेखिका हैं। वे कविता, ग़ज़ल, कहानी और विचारात्मक लेखन में रुचि रखती हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, मौन के अर्थ, प्रेम की नाज़ुकता, जीवन की क्षणभंगुरता और रिश्तों की जटिल भावनाएँ सूक्ष्मता से उभरती हैं। पारंपरिक शिल्प को आधुनिक दृष्टि से जोड़ते हुए, वे शब्दों में सादगी और भावों में गहराई रचती हैं। उनकी रचनाओं में आत्मसंवाद, विरह और अस्तित्व के प्रश्न स्वाभाविक रूप से उभरते हैं, जो पाठक को भीतर तक छू जाते हैं।

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