विश्व कविता दिवस पर चार छोटी कवितायें
विश्व कविता दिवस 2026: हिंदी की चार सुंदर और प्रेरणादायक कविताएँ
विश्व कविता दिवस हर वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है, जो साहित्य, भावनाओं और अभिव्यक्ति की सुंदर कला को समर्पित है। कविता वह माध्यम है जो शब्दों के जरिए दिल की गहराइयों तक पहुँचती है और जीवन के हर रंग को सरल लेकिन प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। आज के इस विशेष अवसर पर प्रस्तुत हैं चार छोटी लेकिन अर्थपूर्ण हिंदी कविताएँ, जो प्रेम, जीवन, संवेदनाओं और आशा के विभिन्न पहलुओं को उजागर करती हैं। ये लघु कविताएँ न केवल पढ़ने में सहज हैं बल्कि पाठकों के मन में गहरी छाप भी छोड़ती हैं।
लेखन मुझे क्षमता देता है शक्ति देता है जीवन के हर पहलू को बारीकी से देखने की, सोचने पर विवश कर ही देता है क्योंकि सोचना मानसिक व्यायाम है इस से ही व्यक्ति का विचारों का दायरा विस्तृत होता है। यह सब फिर आपके व्यक्तित्व में परिलक्षित होता है। लेखन में मेरे समक्ष असंख्य विषय उपस्थित हो जाते ही हैं चाहे वो समाचारपत्र में छपी कोई घटना हो, कोई खबर हो जो दिल को झकझोर दे या कोई ऐसी बात हो जो दिल को छू जाये, साथ ही समाज में व्याप्त कुसंगतियों, समस्याएं हो, इन सभी पर मेरी लेखनी अनायास ही चल पड़ती है।
दिल से लिखती हूॅं!
मन को खोलकर रख देती हूॅं।
दिल की बातों को
बिना दिखावा लिखती हूॅं।
मन को जो भाए,
ऐसा गीत लिखती हूॅं।
कलम जब उठती है,
तो अपना पराया ना देखती है।
वो तो प्रकृति के कण-कण में
संगीत ढूंढ लेती है।
भावों को, वेदना को,
दर्दों को, दवाओं को,
कल्पना को, हकीकत को,
मिश्रित भावनाओं को
कागज़ पर उतारती हूँ।
प्यार को, विरह को,
जज़्बातों को, ठहराव को,
बहती हुई धारा को,
पत्थर पर पड़ते पानी को
देती हूॅं स्थायी का प्रारूप।
बांधती हूँ शब्दों को,
चुन-चुनकर अक्षरों को,
आंचल में लगाकर
इक छोटी सी गांठ प्रेम की।
काली अंधेरी रात में
जगमगाते जुगनुओं की तरह
तब कविता दिलों के
पार जाकर मुस्कान खिला जाती है।
बात चली है कवि-कविता और पाठक की!
का साकार रूप हुआ करती है।
कल्पना वास्तविकता से अलग
अनूठा सौंदर्य ओढ़ा हुआ करती है।
कल्पना की उड़ान
कवि भर लिया करता है,
अपनी रचना को यूं
सजा लिया करता है।
कल्पना से हकीकत का
क्या मुकाबला भला?
वो तो बेशक ज़्यादा हसीं
हुआ करती है।
ये भी तो सच है ज़नाब कि
अपनी संतान खुद से
बढ़कर लगा करती है,
कवि को भी अपनी कविता स्वयं
से ज़्यादा खूबसूरत लगा करती है।
कवि की बात चली,
चली है बात कविता की।
गर पढ़ने वाले की चर्चा ना हों तो
गुस्ताख़ी हमसे हो जाएगी।
तो जो यह कविता
आत्मसात किया करता है,
निस्संदेह वो पाठक इन सबसे
ऊपर हुआ करता है।
कल्पना की उड़ान के साथ पींगे
जो पाठक भर लिया करता है,
वो दिल का धनी
बेहद खूबसूरत हुआ करता है।
कलम जो चले अपनी चाल!
कलम जो टेढ़ी चलें तो बन जाती है शूल।
हिल जाते हैं राजवाड़े,डोल जाती है सत्ताएं,
राजनीति की बिसात रुख बदलती है कलम के इशारे से ही!
ताकत कलम की से वाक़िफ कराती हूॅ॑
कलम ऐसा अचूक अभेद शस्त्र है जो
वार करे सीधे दिल पर,झंझोडकर रख दें मन,
ऐसा होता है सशक्त प्रभावकारी लेखन।
कुरीतियां, विसंगतियां, सामाजिक समस्याएं,
सब भरती हैं पानी इसकी चाल के आगे,
थर-थर कांपे अभियुक्त, दोषी कलम जो टूट जाए।
निरपराध को बचाए कलम का लिखा सटीक बाण।
कलम की धार को पैना करते रखिए,
कि प्रहार ना जाए इसका कभी खाली
सारे जहां में इसका ना कोई सानी,
झुकाते हैं सिर सभी समक्ष कलम की ओजस बानी!
मैं लेखिका, कलम की धार से करूं मैं प्रहार!
अभिव्यक्तियों को संजोती है,
धीरे-धीरे अपने मन के राज खोलती है,
कभी कली सी खिल प्रसन्नता बिखेरती है,
कभी गमगीन वातावरण बना
लेखनी से रुला जाती है,
बच्चों की किलकारियां सी चले कलम,
कभी बुजुर्गो की गम्भीरता को शब्द दे,
समाज के विभिन्न पहलुओं को अपने
आंचल में समेटे पल-पल
बरसाए वो कभी होली के रंग
तो कभी दिया जलाए दिवाली का,
स्वयं जलकर रोशनी बिखेरे
अपने शब्दों की धार से
करें विसंगतियों पर प्रहार
वो है बस एक लेखिका!
✍️ लेखिका के बारे में
प्रियंका सक्सेना ‘जयपुरी’ समकालीन हिंदी साहित्य की सक्रिय लेखिका हैं। वे कविता, ग़ज़ल, कहानी तथा हिंदी साहित्य, संस्कृति, इतिहास और हिंदी व्याकरण से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं।
उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, प्रेम, जीवन के सूक्ष्म भाव और रिश्तों की गहराई सहजता से उभरती है। सरल शब्दों में गहरी भावनाओं को व्यक्त करना उनकी लेखनी की विशेषता है।

beautiful poetries!
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