एक एकड़ से शिखर तक (धारावाहिक उपन्यास) – भाग 32: झलकियाँ, जो रह गईं अधूरी

 अगर आपने पिछला भाग नहीं पढ़ा है तो   भाग 31 - एकांश — एक सपना ज़मीन पर पढ़कर शुरुआत करें।

भाग 32: झलकियाँ, जो रह गईं अधूरी

गांव की सुबह आज कुछ अलग है । सजे हुए रंगीन झंडे, बच्चों की खिलखिलाहट और हर कोने से आती ढोल-नगाड़ों की धुनें... एकांश रीजनल सेंटर और मौली लर्निंग हब  के उद्घाटन के बाद गांव शायद आज अपनी ही ख़ुशी में  झूम उठा है । एकांश रीजनल सेंटर  केवल एक भवन नहीं, विक्रम की बहन मौली की स्मृतियों, विक्रम के संघर्षों और मौली के सपनों से जन्मा मिशन है । मौली लर्निंग हब उस बच्ची को समर्पित है जो शिक्षा से दुनिया बदलना चाहती थी यानी 'मौली' आज उसके नाम पर एक पूरी पीढ़ी बदलने की ओर अग्रसर है।

एकांश टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड  की यह सबसे भावनात्मक पहल है - मौली के नाम पर बना यह ग्रामीण डिजिटल शिक्षण केंद्र। जो सिर्फ एक गांव नहीं, एक जनजागृति की पहल है । कल हुए उद्घाटन में गाँव के बच्चे, शिक्षक, अधिकारी और कई स्वयंसेवी संस्थाएं शामिल थीं।

कल जब विक्रम ने मंच से कहा था - अपनी शांत, संजीदा मुद्रा में, लेकिन आँखों में अद्भुत आत्मविश्वास और गहराई लिए, “मैंने अपनी बहन मौली को खोया... लेकिन हर उस बच्ची में उसकी झलक देखता हूँ, जो सपने देखती है।”

एक पल को वहां सन्नाटा छा गया था फिर तालियों की गड़गड़ाहट ने गाँव की हवा में नमी घोल दी थी। 

उद्घाटन के अगले दिन विक्रम अपने रूम से जल्दी ही तैयार होकर एकांश रीजनल सेंटर की तरफ निकल गया है। गाड़ी में बैठते हुए वह कुछ याद करके मुस्कुरा दिया। कल हुए उद्घाटन समारोह में मंच से उतरते हुए विक्रम की निगाहें भीड़ में किसी को खोज रही थीं प्रिया को लेकिन वह नहीं आई थी।

एक दिन पहले, पुणे से उसका संदेश आया था -
"विक्रम , मुझे कोल्हापुर में  एक एनजीओ  द्वारा आयोजित एक जरूरी पॉलिसी आउटरीच सेशन  में जाना पड़ा है। बहुत ज़रूरी है । मैं उद्घाटन के अगले दिन ‘मौली लर्निंग हब ’ पर आ रही हूँ, मेरा वादा है।"

विक्रम ने बस मैसेज में जवाब दिया था -
"समझता हूँ। और जानता हूँ, तू मौली के लिए आएगी ज़रूर।"

प्रिया अब विक्रम की ही कंपनी एकांश टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड में टेक लीड ( Tech Lead ) है।  विक्रम और प्रिया की फिर से नज़दीकियाँ तब बढ़ीं जब विक्रम ने अपनी कंपनी "एकांश " को विस्तार देने का निर्णय लिया और एक टैलेंटेड टेक लीड  की तलाश की। 

यह करीब आज से डेढ़ साल पहले की बात है। प्रिया, जो उस समय मुंबई में एक मल्टीनेशनल कंपनी में बतौर इंजीनियर काम कर रही थी, अपनी नौकरी से ऊब चुकी थीक्योंकि उसे सिर्फ कोडिंग से नहीं, उद्देश्य से जुड़ना था।
विक्रम ने जब उसे प्रस्ताव दिया,“मुझे तेरी ज़रूरत है, इस बार सिर्फ दोस्ती में नहीं, तेरे भाई को मिशन में भी”,
तो उसने मुस्कराते हुए कहा,
“मैंने कभी खुद को ‘मौली क्लास’ से अलग नहीं समझा। अब प्रोफेशनली भी जुड़ने का वक्त है।”
तब से प्रिया एकांश में टेक लीड  है। डेटा सिस्टम, रूरल लर्निंग ऐप और स्मार्ट क्लास एनालिटिक्स की पूरी जिम्मेदारी उसी के पास है।

तभी विक्रम की कार रुकी और वह अपने ख्यालों से बाहर आया। आज रक्षाबंधन का पावन पर्व है। इस दिन मौली के जाने के बाद से विक्रम उदास ही रहता है। आज मौली लर्निंग हब में बच्चियाँ एक-दूसरे को राखियाँ बाँध रही हैं। एकांश रीजनल सेंटर के कर्मचारी उन्हें मिठाइयाँ बाँट रहे हैं। सब लड़के-लड़कियों  की आँखों में एक अलग सी चमक है - मौली की मौन प्रेरणा अब इन सभी बच्चों के बीच जीवित है।

विक्रम वहीं एक कोने में बैठा हुआ है बच्चों को निहारते हुए। तभी आस्था पास आई, चाय का कप बढ़ाते हुए,
“आप अब भी सोच रहे हो ना कि कैसा होता अगर मौली आज होती?”
विक्रम मुस्कराया,“सोचना नहीं छोड़ा मैंने... बस अब उसकी जगह कई चेहरों में देखता हूँ उसे।”

तभी वहां एक कार रुकती है और उसमें से प्रिया उतरती है।  उसके हाथों में रोली चावल से सुसज्जित टीके की थाली है जिसमें एक बहुत ही सुन्दर रेशमी राखी रखी हुई है। विक्रम प्रिया को देखते ही लपककर उसके पास आता है।  आस्था भी उसका अभिवादन करती है। सबसे पहले आस्था, प्रिया और विक्रम मौली लर्निंग हब में जाते हैं। 

प्रिया : "एक मिनट मैं अभी आई। "
"अरे! अभी तो आई हो ! अब कहाँ चली?" बोलते बोलते विक्रम रुक गया। 
प्रिया मौली लर्निंग हब के प्रवेश द्वार पर स्थापित मौली की मूर्ति के पास गई वहां उसने वह राखी रखकर हाथ जोड़कर कुछ  प्रार्थना की इसके बाद वह पलटी और विक्रम और आस्था के पास पहुंची। 

प्रिया ने विक्रम के रोली का टीका लगाया उसके हाथ पर राखी बंधी और अपने साथ लाई  मिठाई से विक्रम का  मुँह मीठा किया और आस्था को भी मिठाई खिलाई। 
विक्रम की आँखों में प्रिया  के राखी बांधते ही एक अनकहे एहसास के वशीभूत आँसू छलक पड़े। प्रिया ने हाथ बढ़ाकर उन्हें पोछते हुए कहा." आज नहीं विक्रम! आज मौली जहाँ कहीं भी होगी बहुत खुश होगी। तुमने उसका सपना साकार कर दिया।  पर अब रोकर तुम उसकी आँखों में भी आँसू ले आओगे। "
"नहीं! नहीं! मेरी प्यारी बहन की आँखों में आँसू आये वो भी मेरी वजह से, ऐसा मैं नहीं होने दूंगा। "विक्रम ने झट से अपने आँसू पोछते हुए कहा 
"हाँ तो अब बस मुस्कुराओ !"
विक्रम, प्रिया और आस्था मुस्कुराने लगे।  दूर खड़े रमा और मोहनलाल ने अपनी अपनी आखें चुपके से पोंछ ली और एक दुसरे को देख कर मुस्कुराने लगे। 

तभी वहां दो कारें आकर रुकी।  उन कारों में से एक से शशांक, रागिनी और विवेक व  दूसरी से राशि और  हर्षिता उतरे। 
दरअसल सुपर 8  के अन्य सभी दोस्त उद्घाटन के अगले दिन गाँव आने वाले हैं - यह बात आस्था को ही मालूम है बाकी प्रिया और विक्रम के लिए यह एक सुखद सरप्राइज़ है। 
आकाश ने एक साल पहले ही अपनी एनजीओ का बेस भी पुणे शिफ्ट कर लिया था। 
उसका कहना है, “जहाँ विक्रम और शिक्षा का मिशन होगा, वहाँ मैं पहले से मौजूद रहूँगा।”
प्रिया, आस्था और आकाश अब एकांश  के ऑपरेशनल विस्तार में प्रत्यक्ष सहयोग कर रहे हैं - एक कोर मिशन टीम की तरह।

सुपर 8 के सभी साथियों को देखकर विक्रम और प्रिया के चेहरे खिल उठे। फिर तो जो बातें शुरू हुईं तो लग ही नहीं रहा था कि ये सभी ऊंची पोज़िशन्स पर बैठे प्रोफेशनल्स बात कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है मानो काॅलेज में जाने वाले स्टूडेंट्स गप्पे मार रहे हैं।

वहां से आस्था जाने लगी तब सभी को ख्याल आया। प्रिया और रागिनी लपककर उसके पास आईं और उसे भी बातों में शामिल कर लिया। एकदम काॅलेज वाला माहौल बन गया वहां पर।

शाम को जब बच्चे धीरे-धीरे अपने घर जा चुके  हैं और सेंटर में अब बस कुछ कर्मचारी और प्रिया को छोड़कर सुपर 8 और आस्था ही रह गए हैं कि  तभी प्रिया वहां एक फाइल लेकर पहुँची।
विक्रम को देखकर बोली,
“उद्घाटन मिस करना बहुत भारी लग रहा था… लेकिन जो खबर लायी हूँ, वो शायद उससे भी भारी है।”
विक्रम चौंक उठा—“क्या हुआ?”

क्रमशः  

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