खाली गिलास - लघु कथा
खाली गिलास
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एक खाली गिलास ने रिश्तों की सच्चाई उजागर कर दी — संवेदनाओं को झकझोर देने वाली लघु कथा।लघु कथाखाली गिलास: एक दर्द भरी लघु कथा | बुजुर्गों की उपेक्षा पर विचारसुमित्रा और कमल के पुत्र का जन्मदिन है। कमल की माताजी ने पकवान बनाकर चार बजे तक रख दिए। “माताजी, कमरे में रहना। कहीं आपको देखकर कोई डर न जाए।” सुमित्रा कहकर मुँह बिचकाकर चलती बनी। माताजी १०×१० के कमरे में चारपाई पर बैठ गईं। मालूम था, चार-पाँच घंटे पार्टी चलेगी। तब तक यहीं रहना है। छह साल पहले काम करते हुए कुकर फट जाने से मुँह जल गया था। वही बात बहू कह गई। प्यास लगी तो देखा गिलास में पानी नहीं है। दस बजे कमल खाना लाया तो देखा माँ नहीं रहीं। उनके हाथ में खाली गिलास था। मन की बातबुजुर्ग हमारे जीवन की जड़ें होते हैं, जिनकी छाया में हम बड़े होते हैं। लेकिन कई बार आधुनिक जीवन की भागदौड़ में हम उन्हें अनदेखा कर देते हैं। ❓ प्रश्नक्या हम अपने बुजुर्गों का पर्याप्त ध्यान रख पा रहे हैं? आपका क्या मानना है?
क्या आज के समय में बुजुर्गों की उपेक्षा बढ़ती जा रही है?
क्या जाने-अनजाने में अपने ही अपनों की अनदेखी कर देते हैं? या बुज़ुर्गों का अपमान और प्रताड़ना बुढ़ापे में उनकी नियति बन जाती है? 👉 अपनी राय कमेंट में ज़रूर साझा करें 👉 ऐसी ही और लघु कथाएँ व विचार पढ़ने के लिए: |

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