चेहरे की चमक असली है - लघु कथा
चेहरे की चमक असली है
हम अक्सर सुंदरता को केवल चेहरे की चमक और बाहरी रूप से जोड़कर देखते हैं। लेकिन असली सुंदरता क्या सिर्फ दिखावे में होती है? यह लघु कथा हमें यही सोचने पर मजबूर करती है कि सच्ची चमक भीतर की मेहनत और आत्मविश्वास से आती है।
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| रंग नहीं, आत्मविश्वास और सफलता ही चेहरे की असली चमक होती है — एक प्रेरणादायक लघु कथा। |
लघु कथा
#सुंदरता
चेहरे की चमक असली है | प्रेरणादायक लघु कथा
बुआ ने आज फिर कृष्णा को सुनाया,
“कृष्णा, अपनी मोहिनी दीदी से सुंदर बनने के कुछ गुर सीख ले, कैसा दमकता रूप निखरा है मेरी मोहिनी का।”
सुधा से बोली,
“भाभी, कृष्णा से कह दो, उबटन कर लिया करे, तवे जैसा पक्का रंग पाया है, जाने कैसे नैया पार लगेगी।”
सुधा कृष्णा को बुआ की बातों पर ध्यान न देने और पढ़ने के लिए प्रेरित करती।
समय बीता, मोहिनी की शादी बड़े घर में हो गई।
एक दिन बुआ को कृष्णा ने प्रसाद दिया।
“कृष्णा, शादी तय हो गई क्या? फेशियल कराया क्या? चेहरा बड़ा चमक रहा है, तेरा!”
सुधा बोली,
“दीदी, कृष्णा ने सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली है। चेहरे की चमक असली है।”
मन की बात
समाज में अक्सर वाह्य सुंदरता को बहुत महत्व दिया जाता है लेकिन सच्चाई यह है कि असली चमक हमारी मेहनत, आत्मविश्वास और उपलब्धियों से आती है।
कृष्णा की तरह अगर हम अपने लक्ष्य पर ध्यान दें और दूसरों की नकारात्मक बातों को अनदेखा करें तो सफलता खुद हमारी पहचान बन जाती है।
चेहरे की चमक कुछ समय के लिए हो सकती है लेकिन ज्ञान और मेहनत से आने वाली चमक जीवनभर साथ रहती है।
कभी-कभी समाज बाहरी रूप से हमें आंकता है पर असली पहचान हमारे कर्म और आत्मविश्वास से बनती है। यह लघु कथा उसी सच्चाई को उजागर करती है कि चमक चेहरे की नहीं, व्यक्तित्व की होती है।
❓ प्रश्न
क्या असली सुंदरता केवल चेहरे की होती है?
नहीं, असली सुंदरता व्यक्ति के विचारों, आत्मविश्वास और उपलब्धियों में होती है।
आपका क्या मानना है?
क्या आज भी समाज में बाहरी सुंदरता को ज़्यादा महत्व दिया जाता है?
क्या आपको लगता है कि समाज में रंग-भेद आज भी मौजूद है?
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