एक एकड़ से शिखर तक (धारावाहिक उपन्यास) – भाग 33: अनजान कॉल, अनसुलझे सवाल

 अगर आपने पिछला भाग नहीं पढ़ा है तो भाग 32: झलकियाँ, जो रह गईं अधूरी पढ़कर शुरुआत करें।

भाग  33: अनजान कॉल, अनसुलझे सवाल

एक व्यस्त दिन के बाद सूर्यास्त के वक़्त जाते हुए सूरज की हल्की-फुल्की धूप एकांश रीजनल सेंटर में  मौली लर्निंग हब  की दीवारों पर पड़ रही थी। कार्यक्रम की हलचल अब थम चुकी है  लेकिन विक्रम के मन में एक नई बेचैनी जाग चुकी है। प्रिया ने वो फाइल खोलकर विक्रम को एक ओर बुलाया।

प्रिया ने वो  पुरानी फाइल खोलते हुए धीमे स्वर में कहा,
“कल सुबह यानी जब मौली लर्निंग हब का उद्घाटन हुआ तभी ऑफिस में एक कॉल आया था। अनजान नंबर से। सिर्फ एक सेकंड रिंग हुई। पर… यही नंबर मौली के गुम होने वाले दिन भी एक्टिव था। । नंबर अजीब था— ट्रेसिंग करने पर भी लोकेशन नहीं मिली।”

विक्रम एकदम ठिठक गया, “क्या? सात साल पहले?”

प्रिया, “बात ये नहीं कि कॉल आया, बात ये है कि यह नंबर पिछले सात सालों से किसी सिस्टम में एक्टिव नहीं था। लेकिन वही नंबर मौली के गायब होने वाले दिन भी सिस्टम में एक्टिव था। अचानक कल ही  एक्टिव हुआ और अब फिर बंद है।”

विक्रम धीरे से बोला, “सात साल पहले … यानी मौली के गायब होने  के बाद…”

प्रिया, “मुझे यह सामान्य नहीं लग रहा विक्रम। क्या पता, ये एक इत्तफाक नहीं... एक संकेत हो।”

"नंबर के बारे में कुछ पता चला ?"

प्रिया ने गंभीर स्वर में सिर हिलाया, “हाँ। कॉल ट्रेस करने की कोशिश की थी, लेकिन लोकेशन... शून्य। सिस्टम में कोई डिजिटल फुटप्रिंट्स नहीं हैं। ये नंबर सामान्य नेटवर्क से नहीं आया।”

“तो फिर?” विक्रम की आवाज़ कुछ धीमी पड़ी।

“विक्रम, यह एक इंटरनेट कॉल थी। वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल, जिसे हम संक्षेप में VoIP कहते हैं। ये कॉल मोबाइल नेटवर्क से नहीं, बल्कि इंटरनेट से किया गया था।”

विक्रम ने भौंहें सिकोड़ते हुए पूछा, “ओह!”

“हाँ और इसका मतलब ये कि इसमें कोई सिम कार्ड नहीं होता। कॉल करने वाला किसी खास ऐप या सॉफ्टवेयर से इंटरनेट के जरिए सीधे बात करता है। अगर कॉल करने वाले ने VPN यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का इस्तेमाल किया हो तो उसकी असली लोकेशन छुप जाती है। 

“मतलब नकाब में छिपा चेहरा?” विक्रम ने धीरे से कहा।

प्रिया आगे बोली,“और अगर उसने डीएनएस लीक्स को भी ब्लॉक किया हो तो नेटवर्क की असली जानकारी बाहर नहीं आती। यही कारण है कि इस कॉल की लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही।”

“डीएनएस लीक – मतलब डोमेन नेम सिस्टम  लीक?” विक्रम ने पूछा।

“हाँ, डीएनएस (DNS) लीक – डोमेन नेम सिस्टम  लीक। जब हम कोई वेबसाइट खोलते हैं, तो इंटरनेट हमारी लोकेशन और नेटवर्क से उस साइट को जोड़ता है। अगर ये लीक हो जाए तो हमारी पहचान उजागर हो सकती है। लेकिन जिस सिस्टम से ये कॉल हुआ, उसने डीएनएस लीक को भी ब्लॉक कर रखा था।”

विक्रम अब गहरी सोच में पड़ गया। 
“तो इसका मतलब… ये कोई आम कॉल नहीं थी। ये सब कुछ सोच-समझकर किया गया था।”

“और सिर्फ इतना ही नहीं,” प्रिया ने कहा, “नेटवर्क का जो पैटर्न मिला है, उसमें मल्टी-लेयर रिडायरेक्शन है। कॉल करने वाले ने अपना आई पी एड्रेस (IP Address)  कई जगहों से गुजारकर एक फर्जी लोकेशन बना दी है।”

विक्रम की आँखों में गुस्से और पीड़ा का अजीब मिश्रण है।

“मतलब किसी ने जानबूझकर अपने आपको छुपाया। लेकिन क्यों?”

विश्राम गृह में सन्नाटा

परेशान विक्रम, प्रिया, आस्था, आकाश, शशांक, राशि, रागिनी और विवेक विश्राम गृह लौटे। दिन भर के कार्यक्रम के बाद सुपर 8 के सभी सदस्य रात का खाना खाकर  जल्द ही  अपने कमरों में सोने चले गए। माँ बाबा पहले ही सो चुके हैं।  

गांव  की गहराती रात और दीवारों पर लिपटा सन्नाटा, किसी आने वाली हलचल की चुप चेतावनी जैसा लग रहा है।  रात में जब सब थककर सो गए, आस्था और विक्रम अकेले बाहर बरामदे में  बैठे हुए हैं। 

“तुम परेशान लग रहे हो,” आस्था ने पूछा 

विक्रम की निगाहें आकाश में कहीं खोई हुई हैं। उसने धीमे से कहा,
“कल  सुबह एक कॉल आया था। अनजान नंबर से। सिर्फ एक सेकंड रिंग हुई। पर… यही नंबर मौली के गुम होने वाले दिन भी एक्टिव था।”

आस्था की आँखें चौड़ी हो गईं।
 “तो ये सिर्फ एक संयोग नहीं हो सकता…”

विक्रम की निगाहें दूर गाँव की ओर थीं। 
“कल जो कॉल आया था… वही नंबर मौली के लापता होने वाले दिन भी सक्रिय था। और अब वो फिर से दिखा, फिर गायब हो गया।”

आस्था सन्न रह गई।
“तुम्हें कैसे पता?”

“प्रिया ने बताया। वो इसे ट्रेस कर रही है। कॉल रिकॉर्ड बहुत पुराने हैं, लेकिन नेटवर्क पैटर्न से कुछ संकेत मिले हैं… पर नंबर अब बंद है।

तकनीकी धागों में उलझती गुत्थियाँ

अगली सुबह जब प्रिया सोकर उठी तो  विक्रम उसे एक ओर ले गया। आकाश और आस्था भी साथ खड़े हैं। 
“वो कॉल… कुछ पता चला?”

प्रिया के चेहरे पर गम्भीरता है। 
“विक्रम, नंबर वॉयस ओवर इंटरनेट  प्रोटोकॉल (VoIP) का है।”

“फिर तो ?” विक्रम ने पूछा।

“हाँ वॉयस ओवर इंटरनेट  प्रोटोकॉल  मतलब इंटरनेट से कॉल किया गया था, बिना किसी सिम कार्ड के। ऐसे कॉल्स को ट्रेस करना मुश्किल होता है। मैंने रातभर उस कॉल के आई पी  पैटर्न पर काम किया है। कुछ संकेत मिले हैं… लेकिन वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) कॉल्स अक्सर VPN से जुड़ी होती हैं।

VPN?” आस्था ने पूछा।

प्रिया ने समझाया,
वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी VPN - ये यूज़र की लोकेशन और आई पी एड्रेस  को छुपा देता है। जैसे कोई दिल्ली से कॉल कर रहा हो, लेकिन दिखेगा कि कॉल न्यूयॉर्क से आया है।

विक्रम समझ चुका है कि ये कोई साधारण कॉल नहीं है। 
बहुत मुश्किल है। ” 
विक्रम बोला 

“और अगर कॉल Tor ब्राउज़र के ज़रिए की गई हो… तो पता लगाना लगभग नामुमकिन है।
आकाश ने कहा, “Tor मतलब  The Onion Router - एक नेटवर्क और ब्राउज़र है जिसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यूज़र की पहचान, लोकेशन और ब्राउज़िंग एक्टिविटी को पूरी तरह से गोपनीय (anonymous) रखा जा सके।

हाँ, एक ऐसा ब्राउज़र जो किसी की लोकेशन या पहचान को छुपाने के लिए बनाया गया है। उसमें डेटा कई सर्वरों से होकर जाता है, जैसे प्याज़ की परतें - इसलिए इसे The Onion Router  या संक्षेप में Tor कहते हैं। हर परत अगले की पहचान नहीं जानती।क्योंकि Tor नेटवर्क में यूज़र का डेटा कई लेयर्स यानी परतों से होकर गुजरता है  -  जैसे प्याज़ की परतें। हर रिले  (मध्य बिंदु) सिर्फ अगले बिंदु को जानता है, लेकिन पूरे रास्ते को नहीं। इससे किसी एक बिंदु के लिए यूज़र की असली पहचान जान पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।” प्रिया ने कहा 

क्रमशः 

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आगे क्या होता है?
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