एक एकड़ से शिखर तक (धारावाहिक उपन्यास) –भाग 47: रॉनी कॉर्प की प्रतिक्रिया
अगर आपने पिछला भाग नहीं पढ़ा है तो भाग 46: जनता बनाम सत्ता: पहली गोली कलम से पढ़कर शुरुआत करें।
भाग 47: रॉनी कॉर्प की प्रतिक्रिया
मुंबई की हलचल भरी दोपहर है । रॉनी कॉर्प के 34वें फ्लोर पर बने एग्जीक्यूटिव बोर्डरूम में माहौल बारूद जैसा है । कांच की दीवारों से समुद्र का शांत दृश्य दिख रहा है , लेकिन भीतर बैठा रॉनी उस समंदर की शांति से कोसों दूर है । उसकी आंखों में गुस्से की लपटें हैं और मेज पर उसकी उंगलियां बेतहाशा थाप दे रही हैं।
पीआर हेड, डिजिटल टीम और लीगल काउंसल सब अपनी-अपनी फाइलें और लैपटॉप लेकर खड़े हुए हैं । एयर कंडीशनर ठंडी हवा फेंक रहा था, लेकिन किसी के माथे का पसीना नहीं रुक रहा है।
"वो मान नहीं रही है।अगर वो हमें एक्सपोज करना चाहती है,” उसने दांत पीसते हुए कहा, “तो पहले हम उसे ही एक्सपोज करेंगे।”
पीआर हेड ने तुरंत स्क्रीन पर एक पुराना आर्टिकल खोला - वान्या की एक रिपोर्ट, जिसमें उसने एक सरकारी योजना की विफलताओं पर तीखी आलोचना की थी। उस समय यह रिपोर्ट चर्चा में आई थी लेकिन अब पीआर टीम ने उसे नया रूप देने की योजना बना ली थी।
“इसे तोड़-मरोड़ कर, शब्दों को संदर्भ से बाहर निकालकर, ऐसे पेश किया जाएगा जैसे वान्या ने पूरे सिस्टम के खिलाफ झूठ फैलाया हो। ” पीआर हेड ने कहा
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की लिस्ट बनाई गई। कुछ को पैसा देकर, कुछ को गिफ्ट्स भेजकर मैसेज फैलाने की तैयारी हो गई।
"वान्या मेहरा: देशविरोधी पत्रकार?"
"क्या सच में ‘राय आपकी’ पोर्टल एजेंडा चला रहा है?"
लीगल वार
“नोटिस भेजो। बड़ा धमाका होना चाहिए।”
"रॉनी कॉर्प पर लगे आरोप झूठे और आधारहीन हैं। कंपनी कानूनी कार्रवाई करेगी।"
" डिजिटल ग्राम प्रोजेक्ट की कंपनी एकांश पर धोखाधड़ी का आरोप!"
कुछ चैनलों पर बहस होने लगी -
"क्या एकांश टेक्नोलॉजी कॉर्पोरेट फंडिंग के नाम पर लोगों को धोखा दे रहा है?"
"क्या यह विदेशी एजेंडा का हिस्सा है?"
विक्रम का जवाब - प्रेस कॉन्फ्रेंस
शाम होते-होते, विक्रम के ऑफिस में माहौल बदल चुका है । राघव ने टीवी बंद कर दिया और बोला, “ये लोग नैरेटिव सेट कर रहे हैं, सर। अगर हमने अब चुप्पी रखी, तो सच दब जाएगा।”
“तैयारी करो। कल सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी।”
अगले दिन, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का हॉल खचाखच भरा हुआ है । कैमरों की फ्लैश, रिपोर्टर्स की चिल्लाहट और लाइव फीड के लिए तैयार न्यूज वैन बाहर खड़ी है।
“ये मामला किसी कंपनी का नहीं है,” उसने शांत लेकिन दृढ़ आवाज़ में कहा,
“ये उस सपने का है जो चूल्हे की आग से उठकर कंप्यूटर की स्क्रीन तक पहुंचना चाहता है।
ये उस बच्चे का सवाल है जो अंग्रेज़ी नहीं जानता, पर सीखना चाहता है।
आज जो हम कह रहे हैं, वो कल की नई शुरुआत हो सकती है।
इसलिए डरेंगे नहीं। और झुकेंगे भी नहीं।”
वान्या भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद होती है। पीछे खड़ी वान्या ने माइक थामा।
उसने एक फोल्डर टेबल पर रखा और कहा—
“ये रहे वो दस्तावेज़ - ईमेल्स, इंटरनल नोट्स, और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स, जो साबित करते हैं कि रॉनी कॉर्प ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर टेंडर फिक्सिंग की।”
वो मीडिया को दस्तावेज़ सौंपती है - ईमेल्स और ऑडियो क्लिप, खुला और प्रमाणिक। फाइलें प्रेस को बांट दी गईं। स्क्रीन पर प्रोजेक्टर के जरिए ईमेल्स दिखाए गए। ऑडियो में रॉनी की आवाज़ साफ सुनाई दे रही थी।
सोशल मीडिया का विस्फोट
यूट्यूब पर प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो वायरल हो गया। ईमेल्स के स्क्रीनशॉट हर जगह शेयर होने लगे।
कुछ स्वतंत्र पत्रकारों और पोर्टल्स ने “People vs Power”, "जनता बनाम सत्ता" टैगलाइन के साथ विशेष रिपोर्ट शुरू कर दी ।
शहरों से लेकर कस्बों तक, लोग कह रहे हैं, “अगर ये सच है, तो रॉनी कॉर्प को जवाब देना होगा।”
शेयर मार्केट में रॉनी कॉर्प के स्टॉक्स 7% गिर गए।
यह पहला झटका लगा रॉनी कॉर्प को जो पब्लिक ने दिया था।
हर आदमी को याद रखना चाहिए लोग सर पर बैठते हैं, बरसों लग जाते हैं ऊपर पहुँचने में..... परन्तु नीचे फेंकने में लोग एक मिनट नहीं लगाते हैं।
रॉनी कॉर्प के भीतर का तूफान
रॉनी अपने आलीशान प्राइवेट ऑफिस में बैठा हुआ है। बाहर कॉरिडोर में अफरा-तफरी मची हुई है - पीआर टीम और वकीलों के फोन लगातार बज रहे हैं उनकी ऊँची आवाज़ें कांच की दीवारों से टकराकर गूंज रही हैं । किसी के स्वर में गुस्सा है तो किसी में घबराहट।
रॉनी ने धीमी चाल से मेज़ पर रखी क्रिस्टल की बोतल की ओर हाथ बढ़ाया,व्हिस्की का एक घूंट लेने के बाद गिलास में बर्फ के टुकड़े गिराए। बर्फ की ठंडी खनक इस शोरगुल में भी साफ सुनाई दी। उसने घूंट लिया, स्वाद को देर तक महसूस किया और कुर्सी पर पीछे झुक गया।
“अब खेल मैं नहीं… सिस्टम खेलेगा।”
कमरे में सिर्फ एसी की ठंडी हवा और उसके शब्दों की गूंज बाकी रह गई मानो यह आने वाले बड़े तूफ़ान की प्रस्तावना हो।
मंत्रालय की चाल
“सर, आपको सचिव महोदय से तुरंत मिलना है। ये देशहित का मामला है।”
विक्रम अगली फ्लाइट पकड़कर दिल्ली पहुँचा। उसी दोपहर को विक्रम मंत्रालय पहुँचा। भारी-भरकम लकड़ी के दरवाजे से सचिव महोदय के कार्यालय के अंदर गया।
“देखिए विक्रम जी, देश के हित में सोचिए। हम आपको पूरा सपोर्ट देंगे - फंडिंग, विस्तार, सरकारी सहयोग, सब मिलेगा।
बस… रॉनी का नाम मत लीजिए। सिस्टम को ही संभालने दीजिए।”
कमरे में कुछ क्षण सन्नाटा रहा।
“अगर मैंने अब मेरी चुप्पी बेची,
तो मौली की यादें गिरवी रख दूंगा।
और मैं ये जुर्म नहीं कर सकता।
मुझे देश के बच्चों को जवाब देना है,
मैं ऐसा नहीं कर सकता हूँ।”
वरिष्ठ अधिकारी की उंगलियां मेज पर रुक गईं। कमरे की हवा भारी हो गई।
बाहर, दिल्ली का आसमान धुंधला हो रहा है मानो आने वाले तूफान की आहट दे रहा हो।
क्रमशः
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