ऐसे घरवालों की ज़रूरत नहीं!

 राकेश ने फोन पर भाभी को उलाहना दिया,"अक्षय की शादी तय कर दी,हमें बताया भी नहीं,भाभी।"

"भैया,सब जल्दी-जल्दी में हो गया।"सीमा ने बेचारगी से कहा

"बस , बस भाभी बातें न बनाओ। वो तो अक्षय का दोस्त सुधांशु बाज़ार में  मिल गया,उसने बताया तो घरवालों को पता भी चल गया,वरना भैया की मृत्यु के बाद हमें पराया कर दिया।" राकेश तुनककर बोलै 

ऐसा कहकर मोबाइल पत्नी रानी को पकड़ा दिया,उसने भी उसी लहज़े में सीमा से बात की। बात तो क्या की रानी ने, शिकायत ही की।  

सीमा ने बहुत समझाया, देरी से बताने के लिए माफ़ी मांगी, तब जाकर माने। एहसान जताते हुए बोले कि  कोई काम हो तो बताना। 

फोन रखकर सीमा यादों में खो गई।

दस वर्ष पहले बत्तीस साल में ही अपने पति रमेश को खो दिया।रमेश को एक रात अस्थमा का पैनिक अटैक आया,अस्पताल ले जाते-जाते उनके प्राण निकल गए।देवर देवरानी घर में मौजूद थे,सास-ससुर के साथ रहते थे।कितना दरवाजा पीटा देवर का,पर वे बाहर नहीं आए।अंदर से ही कह दिया,बाम लगा लो सीने पर,आराम आ जाएगा।सास-ससुर बुजुर्ग थे।अकेले ही एंबुलेंस में अस्पताल लाई थी,परंतु पति को नहीं बचा पाई।

रमेश की मृत्यु के थोड़े दिनों बाद देवर-देवरानी ने सास-ससुर को न जाने क्या पटृटी पढ़ाई कि उन्होंने सीमा को दो बच्चों के साथ घर से निकाल दिया। 

पंद्रह साल के अक्षय और छह साल की अक्षरा के साथ सीमा ने बहुत मुश्किल से एक घर किराए पर लिया।रमेश सरकार में अच्छी पोस्ट पर थे।सीमा को अनुकंपा नियुक्ति क्लर्क की दी गई थी। कैसे दो बच्चों को पला और समाज से बचते हुए पढ़ाया , वो ही जानती है। 

अक्षरा ग्यारहवीं में पढ़ रही है,अक्षय इंजीनियरिंग कर एक मल्टीनेशनल में काम कर रहा है।कुलीग सौम्या को माॅ॑ से मिलवाया। घर मिलताऊ लड़की है, सीमा को भी सौम्या अच्छी लगी।इस तरह अक्षय की शादी तय हो गई।

एक ही शहर में दस साल से रहते हुए जिन देवर-देवरानी ने कभी हाल नहीं पूछा, वे आज अचानक सगे-सम्बन्धी घरवाले बनकर हक़ जताने लगे। पति की मृत्यु के पश्चात् सास-ससुर एक-एक कर दो साल में ही काल कवलित हो गए।सीमा तब गई थी,परन्तु देवर-देवरानी ने घर में पांव तक नहीं रखने दिया।उन्हें डर था कि सीमा हिस्सा न मांग लें। सीमा तो दस साल पहले ही सब मोह माया त्याग उस घर से आई थी।

सीमा की समझ में नहीं आ रहा था कि देवर देवरानी आज अचानक से सगे कैसे बन गए? 

बच्चों से बात की तो उन्होंने चाचा-चाची को बुलाने से साफ मना कर दिया,सीमा ने भी आज पहली बार अपने को इन फालतू के बंधनों से मुक्त पाया।

दोस्तों, बताइये सीमा ने सही किया या नहीं ? आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा। यदि आपको मेरी यह कहानी पसंद आई है तो कृपया लाइक, कमेंट  एवं शेयर कीजिए। 

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धन्यवाद। 

प्रियंका की कलम से 🖋

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