लॉकडाउन का असर!

रीना के घर में उसके ससुर रमाकांत जी, सासु माँ सुलभा जी, पति सक्षम, छोटी ननद सुरभि, देवर सम्यक और बेटी सिया हैं। सुलभा जी अपनी छोटी बहन से मिलने सूरत गई हुई हैं। उनकी छोटी बहन के यहाँ गृहप्रवेश था।  

चार दिन पहले वापिस आने वाली थी पर अचानक से पूरे देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया और उन्हें सूरत में ही रुकना पड़ गया। महामारी कोविड-१९ के चलते देश में आजकल सब कुछ थम सा गया है।

अब सब घर पर ही रहने वाले हैं। सक्षम और सम्यक ने थोड़ा बहुत खाने पीने का सामान लाकर रख दिया है। बाकी पास के किराने वाले से व दूध-दही पास की डेयरी से ले आते हैं। सरकार ने सुबह चार घंटे के लिए आवश्यक वस्तुओं एवं दवाओं की दुकान खोलने की अनुमति दी है। उसी समय-सीमा में कुछेक सब्जी वाले भी आ जाते हैं। सभी लोग नियम कानून का पालन कर रहे हैं।

 लॉकडाउन से घर में और कुछ हुआ हो या न हो। एक बात तो रोजाना होती है। वो है, आम दिनों के मुकाबले सब को हर समय कुछ न कुछ खाने का मन करना। अब सीमित साधनों के साथ रीना और सुरभि नई नई विधियों को इंटरनेट से सीखकर बनाती हैं।

ऐसे में ही सम्यक का जन्मदिन आता है।  सुबह हलवे का प्रसाद चढा दिया। ननद भाभी ने लगकर केक, छोले भटूरे, पाव भाजी और मेवे की खीर तैयार कर ली। सुबह बात कर सम्यक माँ से आशीर्वाद ले चुका है।। वो भी सम्यक के जन्मदिन को साथ न मना पाने के कारण सुबह उदास लगीं थीं।सुलभा जी से वीडियो कॉल से केक काटने के समय बात करनेवाले हैं सभी लोग। ऐसे ही सरप्राइज से शायद कुछ खुशी मिल जाएगी उन्हें।

असली बात तो होनी अब बाकी है। सुरभि ने जैसे ही अपनी जींस पहननी चाही, उसने ऊपर चढ़ने से मना कर दिया। वो दौड़ी दौड़ी रिया के रूम में गई तो देखा भाभी भी अपनी कुर्ती से जूझ रही हैं। दोनों ननद भाभी ने एक दूसरे को देखा।

थोड़ी देर बाद ...

और दोनों जब लिविंग रूम में आई तो सब बोले,"अरे क्या हुआ! तुम लोग तो नए कपड़ें पहनने वाली थीं जो लॉकडाउन से पहले लाए थे?"

रीना, सुरभि एक साथ बोली , "लॉकडाउन का असर हो गया है, कपडों ने चढ़ने से इंकार कर दिया है।"

दोनों को छोड़कर सभी जोर जोर ठहाके लगाने लगे।

दोनों बोली, "आप लोग हँस रहे हैं और हमारी जान जा रही है। सिर्फ खाना और सोना कर रहे हैं आजकल हम लोग बाहर नहीं जा सकते हैं तो अब घर में ही नेट देखकर एक्सरसाइज करेंगें और छत पर टहलेंगे।

"अच्छा ये बात है।!" सभी एक साथ बोले "कल से हम लोग भी छत पर टहलने में साथ देंगे।"

"चलो अब केक काटते हैं, और सुलभा को वीडियो कॉल करते हैं।" रमाकांत जी बोले "कल से एक नई सुबह का आगाज़ करेंगें।"

हँसते मुस्कुराते सभी सुलभा जी को कॉल करने लगे।

दोस्तों, ये एक साधारण से परिवार की सरल सी कहानी है। लॉकडाउन का पालन करती इस परिवार की मंशा पूरी होगी कि नहीं, पता नहीं। रीना और सुरभि कब अपने मनचाहे कपड़ें पहन पाएंगी, नहीं कह सकते।

यदि आप के घर में भी लॉकडाउन के चलते ऐसा कुछ हुआ है तो कमेंट करके बताइयेगा जरूर।

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प्रियंका की कलम से 🖋 

धन्यवाद।

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