एक एकड़ से शिखर तक (धारावाहिक उपन्यास) – भाग 20: पहली उड़ान, पहली पहचान
अगर आपने पिछला भाग नहीं पढ़ा है तो भाग 19: शब्दों से संवाद तक पढ़कर शुरुआत करें।
भाग 20: पहली उड़ान, पहली पहचान
इंजीनियरिंग के पहले वर्ष की शुरुआत जैसे एक नई किताब का पहला उलझा हुआ पन्ना है जिसे अपनी मेहनत के बल पर सुलझाना है और इसमें महारत हासिल करनी है। विक्रम जानता है यह केवल कॉलेज नहीं, उसके सपनों तक पहुँचने का मार्ग है। पहला सेमेस्टर उसके लिए केवल विषयों का ज्ञान नहीं, खुद को गढ़ने की प्रक्रिया है।
सुबह की शुरुआत 5:30 बजे से होती। नित्यकर्म से निवृत्त होकर वह अंग्रेज़ी शब्दों की सूची बनाता और उच्चारण की प्रैक्टिस करता। फिर क्लास, फिर लैब, फिर ग्रुप स्टडी, हर दिन जैसे एक मिशन की तरह होता। शाम को डिबेट क्लब, TED Talks और नोटबुक में नये विचारों की सूची। रात को देर तक पढ़ाई, आत्ममंथन और मौली के शुभ यात्रा कार्ड की पंक्तियां ।
“जैसे आप पढ़ते हो, वैसे ही मुझे भी पढ़ाना।”
यह केवल एक बहन की अभिलाषा नहीं है यह विक्रम के लिए उसका ध्येय-वाक्य बन चुका है।
प्रथम सेमेस्टर की मजबूत नींव
इंजीनियरिंग के पहले वर्ष में दोनों सेमेस्टर में सभी ब्रांचेज़ का सिलेबस समान होता है। इंजीनियरिंग की सभी शाखाओं को सभी विषय पढ़ाए जाते हैं। विक्रम ने हर विषय पर टारगेट तय किया - मैथ, साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस फिजिक्स , केमिस्ट्री ... दिनभर के काम का ब्यौरा उसकी नोटबुक के पिछले पन्नों में दर्ज होता, जहां उसने अपने साप्ताहिक लक्ष्य (weekly goals) और स्वमूल्यांकन रिमार्क्स (self-review remarks) लिख रखे हैं।
विक्रम का हॉस्टल शेड्यूल:
- सुबह 5:30 बजे जागना, नित्यकर्म से निवृत्त होना
- 6:00–7:00: अंग्रेजी और स्पीकिंग प्रैक्टिस
- 7:00 -8:00: क्लास के लिए नोट्स रिविज़न
- 8:00 -9:00: ब्रेकफास्ट करना
- 9:00–1:00: क्लासेस
- 1:00–2:00: लंच और रिविज़न
- 2:00–5:00: लैब, क्लासेस
- 5:30–7:30: डिबेट क्लब में स्पीच प्रैक्टिस ,TED टॉक्स और ब्लॉग पढ़कर अपडेट करना
- 8:00–9:00 : डिनर करना
- 9:00–11:00: ग्रुप स्टडी
- 11:00–12:00: सेल्फ स्टडी
उसके रूममेट्स शशांक और विवेक भी उसकी मेहनत देखकर प्रेरित होते गए। कुछ महीने के भीतर विक्रम ने हर असाइनमेंट, क्विज, प्रैक्टिकल और टेस्ट में शानदार परिणाम दिए। उसका हौसला बढ़ा और आत्मविश्वास बुलंद हुआ। सेमेस्टर के मध्य में मिड टर्म एग्जाम हुए जिसका रिजल्ट एन्ड सेम एक्साम्स के साथ ही मिलना है। मिड टर्म के बाद सभी जोर-शोर से क्लासेज और लैब में व्यस्त हो गए और दो महीने बाद होने वाले एन्ड सेमेस्टर एक्साम्स की तैयारियों में जुट गए। पहला सेमेस्टर समाप्त होते होते आकाश के साथ विवेक और शशांक भी उसके दोस्त बन चुके हैं।
फिर आए एंड सेमेस्टर एग्ज़ाम्स, हर विषय में उसने न केवल सटीक उत्तर दिए, बल्कि कई प्रश्नों में उसने नए विचार भी जोड़े। फाइनली एन्ड सेमेस्टर भी हो गए। दो हफ्ते की छुट्टियां हुई, सभी छात्रों की तरह ही विक्रम भी छुट्टियों में अपने घर गया। माँ, बाबा और मौली उसे देखकर बहुत खुश हुए। दो हफ्ते बाद कॉलेज खुलते ही रिजल्ट अनाउंस होने वाला है। छुट्टियां बिताकर सभी छात्र कॉलेज पहुँच चुके हैं। कल से कॉलेज खुल रहा है। सभी छात्र हॉस्टल आ गए हैं एक-दुसरे का हाल-चाल मालूम कर रहे हैं।
प्रथम सेमेस्टर का परिणाम
अगली सुबह, कॉलेज के सभागार में प्रथम सेमेस्टर का रिज़ल्ट घोषित किया गया। प्रोफेसर ने घोषणा की:
(फर्स्ट सेमेस्टर बैच टॉपर - विक्रम चौधरी! बधाई हो!)
सभागार में व्याप्त सन्नाटे को तोड़ते हुए करतल ध्वनि गूंज उठी। सारा हॉल तालियों से गूंज उठा। विक्रम खड़ा हुआ, सामने से हजारों आंखों ने उसकी तरफ देखा। शब्दों से नहीं, लेकिन एक आत्मगौरवपूर्ण मुस्कान ने उसका पूरा परिचय दे दिया। मंच पर जाते समय विक्रम की आँखों में आत्मविश्वास है लेकिन चेहरा अब भी विनम्र ... उसकी मेहनत, अनुशासन और सादगी, मंच पर मानो उसके साथ खड़ी हैं। तालियों से सभागार गुंजायमान हो उठा।
दूसरा सेमेस्टर: एक और अध्याय
दूसरे सेमेस्टर में अब टेक्निकल विषयों की गहराई बढ़ चुकी है। विक्रम का झुकाव इलेक्ट्रॉनिक्स है और वैकल्पिक विषय में उसने समाजशास्त्र लिया। एक नया टॉपिक आया - Technology & Society (टेक्नॉलजी & सोसाइटी ), जिसमें एक पब्लिक स्पीच तौय्यार करनी है।
विक्रम ने अपनी बात “Technology and Rural Aspirations” ( टेक्नोलॉजी एंड रूरल एस्पिरेंट्स) विषय पर रखी। उसके शब्दों में गांव के बच्चों की आँखों की चमक है, गांव की स्थिति पर रोशनी डालते हुए वहां के बच्चों की उम्मीदों की झलक है , तकनीक की रोशनी है और मौली की राखी की सादगी की भांति वहां के बच्चों की मासूम सी अभिलाषा है।
(प्रौद्योगिकी सिर्फ तार और मशीनें नहीं है। यह पेड़ के नीचे नंगे पांव बैठी उस लड़की की उम्मीद है जो एक बेहतर दुनिया का सपना देख रही है।)
यह स्पीच रिकॉर्ड हुई और कॉलेज मीडिया चैनल पर अपलोड की गई। कुछ ही दिनों में वह वीडियो वायरल हो गया। छात्रों ने शेयर किया, फैकल्टी में चर्चा हुई और एक ऑनलाइन पोर्टल ने इसका अंश अपने आर्टिकल में छापा।
दूसरे सेमेस्टर के अंत में परीक्षा फिर से आईं। इस बार विक्रम अपने अनुभव के साथ मैदान में उतरा । उसके उत्तरों में स्पष्टता है, सोच में आत्मा है, लेखनी में अंग्रेजी से पहचान साफ दिखाई देती है। अपने उत्तरों को लॉजिक देकर पूर्णता को पहुँचाया गया है।
जब फाइनल रिज़ल्ट घोषित हुआ:
(प्रथम वर्ष टाॅपर - विक्रम चौधरी)
क्रमशः
जानने के लिए पढ़िए अगला भाग... भाग 21: तकनीकी दुनिया की दहलीज़ पर
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