खुदगर्ज़ रेखा - लघु कथा
खुदगर्ज़ रेखा
कभी कभी जब कोई सीधा व्यक्ति अपने लिए सोचने लगता है तब वो स्वार्थी करार दिया जाता है उन्हीं अपनों के द्वारा जिनके लिए उसने अपनी ज़िंदगी होम कर दी। यह लघु कथा उन्हीं खोखले रिश्तों पर प्रहार करती है।
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| खुदगर्ज़ रेखा - पारिवारिक रिश्तों में छिपे स्वार्थ को उजागर करती लघु कथा |
एक बेटी और उसके इर्द-गिर्द स्वार्थी रिश्ते, क्या रेखा ने अपने लिए कुछ सोचकर जुर्म किया? आपका क्या कहना है इस कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया कमेंट सेक्शन में अवश्य दीजियेगा।
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- प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'

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