चुन्नु का रोबोट - लघु बाल कविता

 चुन्नु का रोबोट 

बचपन की छोटी-छोटी खुशियाँ और मासूम सोच हमें बहुत कुछ सिखा जाती हैं।
यह बाल कविता न केवल एक बच्चे की खुशी और उदासी को दर्शाती है बल्कि हमें यह भी सिखाती है कि हर चीज़ की देखभाल जरूरी होती है।
एक प्यारी सी बाल सुलभ लघु कविता जिसमें बच्चे ने रोबोट को डॉक्टर को दिखा दिया की इसकी तबियत ख़राब हो गई कुछ बोल नहीं रहा , चल नहीं रहा , आगे क्या हुआ खुद देखिये। 
बाल लघु कविता चुन्नु का रोबोट का पोस्टर
चुन्नु का रोबोट एक प्यारी सी लघु बाल कविता जो बाल सुलभ हरकतों को दर्शाती है

चुन्नू का रोबोट: एक प्यारी सीख देने वाली बाल कविता

#छोटीसीआशा
एक दिन मचल गया नन्हा चुन्नू,
लोट मार ज़मीन पर फैल गया।
टीवी पर देखा एक खिलौना उसने,
ज़िद कर बैठा वो दिलवाने की।

मम्मी ने जो मना किया 
तो चाचा को तरस आया,
झटपट अपने भतीजे के लिए, 
चाचा रोबोट खिलौना ले आया।

चुन्नू खुश हो लगा खेलने,
खुश होकर सोया फिर चुन्नू।
कुछ दिनों तक खेला चुन्नू,
मन भर कर चलाया रोबोट को।

रिमोट से कंट्रोल करता चुन्नू,
ताली बजाकर हँसता वो,
जब रोबोट दाएँ-बाएँ चलता,
इशारों पर चुन्नू के बटन दबाते ही।

फिर एक दिन चुन्नू का रोबोट,
चलकर न दिया किसी कीमत पर।
चुन्नू हुआ परेशान-उदास,
तभी घर में आए पड़ोसी डॉक्टर दास।

छोटी सी आशा जगी चुन्नू के मन में,
डॉक्टर को दिखाया रोबोटा।
“अंकल, चलता नहीं, हरकत नहीं करता,
तबीयत खराब है इसकी।”

डॉक्टर हँसते हुए बोले,
“लाओ बीमारी दूर कर दूँ इसकी।
लगता है खाना-पीना का 
नहीं रखा इसका ध्यान तुमने।”

चाचा से नई बैटरी मंगाकर,
बदले उसके पुराने सेल।
झटपट दौड़ने लगा रोबोट,
हँसी वापस लौट आई चुन्नू की।

मन की बात

यह छोटी सी कविता बच्चों की मासूम दुनिया को खूबसूरती से दर्शाती है।
चुन्नू की खुशी, उसकी उम्मीद और फिर परेशानी हमें यह समझाती है कि हम अक्सर चीज़ों का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन उनकी देखभाल करना भूल जाते हैं।
यह कहानी बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी एक सीख देती है कि हर वस्तु और रिश्ते को संभालना जरूरी है तभी वे लंबे समय तक साथ निभाते हैं।

❓ प्रश्न

क्या बच्चों को चीज़ों की देखभाल करना सिखाना जरूरी है?
हाँ, इससे उनमें जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है और वे चीज़ों की कद्र करना सीखते हैं।

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