एक एकड़ से शिखर तक (धारावाहिक उपन्यास) – भाग 30: अधूरा रीयूनियन

 अगर आपने पिछला भाग नहीं पढ़ा है तो भाग 29: रीयूनियन प्लानिंग  पढ़कर शुरुआत करें।

भाग 30: अधूरा रीयूनियन 

गांव की हवा में जैसे कुछ नया होने की सुगबुगाहट है। विक्रम ने ऑफिस से एक हफ़्ते की छुट्टी ली और गांव जा पहुंचा। घर पर माँ बाबा उसे देखकर बहुत खुश हुए। विक्रम ने बताया कि कॉलेज के सभी दोस्त आने वाले हैं और जैसे वे सब कॉलेज में पढ़ाई करते वक़्त गांव आये थे वैसे ही वे आएंगे और माँ के हाथों के आलू के पराठें खाएंगे।  
रमा खुश होकर बोली ," ये तो बहुत अच्छा रहेगा।  सभी के आ जाने पर घर में ख़ुशी आ जाएगी और चहल पहल होगी।  वरना मौली के जाने के बाद तो हम लोग जीना ही ..." बोलते बोलते उसका गला रुंध गया 
विक्रम दौड़कर पानी ले आया और माँ को पिलाकर बोला," माँ मौली की कमी तो कोई पूरा नहीं कर सकता है।  वो तो हमारे दिल में रहती है।  हाँ प्रिया मेरी राखी बहन भी आ रही है, पिछले दो सालों राखी  से बांध रही है....  माँ तुम्हें उसे देखकर अच्छा लगेगा। "
"हाँ बेटा तुमने बताया था प्रिया के बारे में ... मुझे वो पहले भी आई थी तब भी प्यारी लगी थी "
"और माँ-बाबा , आकाश, शशांक, विवेक, रागिनी, राशि और हर्षिता भी आ रहे हैं। "
"सुपर आठ आ रहे हैं।" बाबा ने ख़ुशी जताई 
"चलो माँ आप बता दो कि खाने का क्या-क्या सामान लाना है? मैं मिश्रीलाल काका की दुकान से ले आऊँगा। "
"तुम्हारे सारे दोस्त तीन दिन बाद आने वाले हैं तो सामान ताज़ा रहे इसके लिए दो दिन बाद सामान लाना। "
रमा विक्रम को सामान लिखने लगी बाबा भी उत्साह पूर्वक उसमे कुछ-कुछ सामान जोड़ने लगे। 
विक्रम ने एक दीवार पर सुपर 8  की कॉलेज के दिनों की फ्रेम फोटो लगा दी है। 
पास में एक नई डायरी रखी है जिसके आठ पन्ने पर हरेक दोस्त का  नाम लिखा है... हर पन्ना एक दोस्त के नाम।
हफ्तों पहले वीडियो कॉल पर सबने सिर हिलाकर ‘हाँ’ कहा था।
टिकट बुकिंग, कपड़े, उपहार, गांव की गलियों में घूमने की प्लानिंग—सब तय था।
लेकिन...जैसे समय को कुछ और मंज़ूर है।

रीयूनियन से दो दिन पहले ही, राशि को राज्य सचिवालय से मेल आया,
"राष्ट्रीय बाल शिक्षा नीति 2.0" के लिए राज्य स्तर पर पायलट प्रेजेंटेशन।
राशि उस परियोजना की संयोजिका है। वह उत्तर प्रदेश के छह ज़िलों के सरकारी स्कूलों की रिपोर्ट तैयार करवा रही है।
विक्रम को सब बताकर कहती है,
“विक्रम… मैं शर्मिंदा हूँ। इस बार गाँव आने का बहुत मन था… लेकिन यह प्रेजेंटेशन देश के लिए है और… शायद मौली के सपनों का ही विस्तार भी। मुझे माफ कर देना।”
“कोई बात नहीं राशि,” उसने कहा।
“तुम वहाँ रहकर भी यहाँ हो… और मौली को तुम्हारे जैसे ही लोगों से उम्मीद थी।”
वह अपने छोटे से अपार्टमेंट के किचन टेबल पर बैठी, चाय का कप हाथ में थामे, विक्रम को कॉल करती है।
विक्रम ने गहरी साँस ली।

रीयूनियन से तीन दिन पहले, विवेक अपने एडटेक स्टार्टअप "शिक्षा सुलभ" के ऑफिस में रात 11 बजे तक बैठा हुआ है। सामने एक प्रजेंटेशन खुली पड़ी है । तभी फोन बजा... इन्वेस्टर का कॉल आया है। 
“हम आपके पहले प्रोडक्ट लॉन्च पर ही निर्णय लेंगे। और यह इस हफ्ते के सोमवार यानी आज से चौथे दिन निश्चय करेंगे। ”
उसी समय विक्रम का मैसेज आया,
“सब तैयार है भाई। गाँव की मिट्टी और पुरानी गपशप तुम्हारी राह देख रही हैं। बस तीन दिन और... ”
विवेक ने जवाब टाइप किया,
“भाई, इन्वेस्टर ने तारीख़  रीयूनियन के अगले दिन की दी है वहां गया तो यहां का सब बिगड़ जायेगा … इस बार नहीं आ सकूंगा। अगले बार मिलेंगे ज़रूर।”

रीयूनियन से एक दिन पहले, शशांक लखनऊ के अस्पताल की बेंच पर बैठा हुआ है। 
पिता आईसीयू में हैं माँ थकी आँखों के साथ उनके पास बैठी हुई हैं। 
शशांक ने सुपर 8  ग्रुप पर लिखा,
“पापा की तबीयत बहुत खराब है। माँ अकेली हैं। मैं नहीं आ पाऊँगा… पर यादों में ज़रूर रहूँगा।”
विक्रम ने तुरंत कॉल किया और ये जानकर उसे बहुत दुःख हुआ कि शशांक के पापा आईसीयू में हैं उसने उनके जल्दी स्वास्थ्यलाभ की प्रार्थना की और बोला ज़रुरत पड़ने पर साल कर देना मैं आ जाऊँगा। 

रागिनी के मेलबॉक्स में चमका: “Tech4Change Fellowship in Berlin – Selected!” (टेक 4 चेंज फ़ेलोशिप इन बर्लिन - सलेक्टेड) 
तारीख वही... रीयूनियन की।
उसने हवाई अड्डे से अपनी फ़ेलोशिप के बारे में बताते हुए एक छोटा वीडियो भेजा,
“इस बार नहीं आ सकी… सॉरी लेकिन तुम सब की मस्ती वाली फोटोज का इंतज़ार रहेगा।”
विक्रम ने वीडियो देखा और बस हल्के से मुस्कुराया।
उसे शुभकामनाएं भेज दी। 

हर्षिता इस समय एक पहाड़ी गाँव में है जहाँ ना तो  बिजली का ही कुछ अता  पता रहता है और ना ही इंटरनेट का ।
रीयूनियन से दो दिन पहले उसका एक एसएमएस (SMS) आया,
“विक्रम, यहाँ कोई नेटवर्क नहीं। वीडियो कॉल नहीं कर सकती। मेरा आना इस बार नहीं हो पायेगा।”
विक्रम ने जवाब लिखा,
“तुम वहीं हो, जहाँ मौली की आत्मा होती। तुम्हारा होना ही एक रीयूनियन है।”

प्रिया और आकाश, दोनों मुंबई में थे, उनका मैसेज आया कि वे दोनों पहुँच जाएंगे नियत तारिख पर  यानी आज से दो दिन बाद। 
और फिर… बस विक्रम आकाश और प्रिया ही हैं रीयूनियन के लिए। प्रिया ने रक्षाबंधन पर विक्रम को राखी बाँधी।  सभी की आँखें नम हो गई  मौली की याद में। 
रमा ने प्रिया  को गले से लगा लिया।  प्रिया भी भावुक हो गई।  
मौली के कमरे हाल में, दीवार पर Super 8 की फोटो थी—थोड़ी धुंधली, पर आत्मीय।
कछ जगह भर गई पर बहुत कुछ खाली रह गया।
मेज पर रखी किताब के आठ पन्नों में से पाँच अभी भी कोरे रह गए... 
विक्रम ने एक-एक पन्ने को छुआ, जैसे हर दोस्त का चेहरा उसकी हथेलियों में हो।
“रीयूनियन पूरी तरह से नहीं हुआ… पर शायद ये भी ज़रूरी था।”
“दोस्ती मुलाक़ातों से नहीं, मंशा से निभती है।”
फिर उन लोगों ने अपने फोटोग्राफ्स और माँ बाबा के साथ के वीडियो और गांव का स्कूल सड़कें सभी सुपर 8 ग्रुप  में शेयर किये। सभी ने देखा शशांक को छोड़कर वो हॉस्पिटल में अपने पापा की देखभाल कर रहा है। 
"आज सब नहीं आए, पर सब यहीं हैं। रागिनी की उड़ानों में, विवेक के कोड में, शशांक की चुप्पियों में, राशि की रिपोर्ट्स में, हर्षिता की पगडंडियों में... आकाश और प्रिया के संग मैं यानी विक्रम ने तुम सभी को बहुत याद किया।  हम सुपर 8 अलग-अलग दिखते हैं पर एक ही कहानी के पन्ने हैं। एक दिन, हम फिर मिलेंगे और तब ये बचे हुए पन्ने खाली नहीं होंगे।"

क्रमशः

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आगे क्या होता है जानने के लिए पढ़िए अगला भाग... भाग 31: एकांश — एक सपना ज़मीन पर
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