एक एकड़ से शिखर तक (धारावाहिक उपन्यास) – भाग 29: रीयूनियन प्लानिंग
भाग 29: रीयूनियन प्लानिंग
शुक्रवार की शाम बहुत ही अपनी सी लग रही है सुपर 8 को। बाहर हल्की सी बूँदाबाँदी हो रही है। यूँ तो हर शहर की अपनी एक अलग सी कहानी होती है लेकिन उस शाम को जोड़ रही है एक स्क्रीन.... जहाँ आठ खिड़कियाँ खुली थीं, चार अलग-अलग शहरों से आठ दोस्त, जो कभी एक ही हॉस्टल के कॉमन रूम में एकसाथ खाना खाते थे। आज वे एक-दूसरे की वर्चुअल (आभासी) खिड़की से झांकते नज़र आ रहे हैं... स्मृति, संवाद और स्नेह में डूबा वार्तालाप चल रहा है।
“तो चलो, आज हर कोई अपनी कहानी सुनाए... अब कहाँ हैं, क्या कर रहे हैं… और जो भी दिल कहे वो सुनाओ।”
विक्रम कहता है, “हर एक की झलक इसी बहाने मिल जाएगी और अपने सुपर 8 को और बेहतर तरीके से हम जान पाएंगे। हो सकता है कि एक दुसरे के अनुभव से हमें कुछ सीखने को मिले।”
आकाश बोला, “ विक्रम की यही बात मुझे बेहद पसंद है कि वो बातों बातों में बहुत गहरी बात कह जाता है। सच है हम सभी अपने काम में कुछ न कुछ बढ़िया कर ही रहे हैं जिसे बताकर हम आपस में कहकर दूसरे को प्रेरित कर सकते हैं और स्वयं भी सीख सके हैं।”
हर्षिता ने कहा, “सच है सीखने की कोई उम्र नहीं होती है!”
आकाश, जो मुंबई के एक एनजीओ (NGO) में कंटेंट एंड लर्निंग हेड है, सबसे पहले बोलता है।
वह स्क्रीन शेयर करता है... कुछ बच्चों की तस्वीरें दिखती हैं जो मिट्टी से सनी स्कूल यूनिफॉर्म में मुस्कुरा रहे हैं।
“ये हैं मेरे छोटे दोस्त… मैं कभी मौली से नहीं मिला पर इनमें मुझे हर बार मौली दिखती है। वही जिज्ञासा, वही चमक। इनसे बातें करता हूँ तो लगता है मैं अब भी मौली से जुड़ा हूँ।”
सभी थोड़ी देर के लिए चुप हो जाते हैं।
प्रिया, जो एक सीएसआर सलाहकार (CSR कंसल्टेंट) है, उत्साह से बताती है,
“मैं एक स्कूल एडॉप्शन प्रोजेक्ट पर काम कर रही हूँ। वहाँ विक्रम के ‘स्मार्ट रूरल क्लासरूम प्रोजेक्ट ’ से बहुत कुछ सीखा। कई बार सोचती हूँ, विक्रम तूने हमें सपनों की टेक्नोलॉजी सिखाई है।”
रागिनी जो अब एक प्रमुख यू आई /यू एक्स (UI/UX) डिज़ाइनर है, मुस्कराकर जोड़ती है,
“मैंने एक एनजीओ (NGO )के लिए वेबसाइट बनाई है। उसमें ‘मौली क्लास’ को भी एक पूरा पेज दिया है। तुम्हारा काम अब इंटरनेट पर अमर है विक्रम।”
विक्रम हल्की मुस्कान देता है लेकिन कुछ कहता नहीं।
विवेक, जो बैंगलोर में है, अपनी योजना साझा करता है,
“मैं एक ग्रामीण एडु-टेक स्टार्टअप की योजना पर काम कर रहा हूँ। मैं चाहता हूँ सुपर 8 उसमें अंशधारक बने, सुपर 8 उसके बोर्ड में शामिल हों। ये सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, एक प्रतिबद्धता होगी।”
राशि और हर्षिता, दिल्ली से जुड़ी हैं, और उनकी आँखों में अलग चमक है।
राशि बोलती है,
“हमने मिलकर एक लक्ष्य रखा है – अगले साल तक 100 गाँवों में लड़कियों को टेक्नोलॉजी स्किल्स सिखानी हैं।”
हर्षिता जोड़ती है,
“और हम ये काम सिर्फ स्किल्स के लिए नहीं कर रहे, बल्कि आत्मनिर्भरता के लिए। हर लड़की में एक मौली है।”
शशांक, जो अब डेटा एनालिटिक्स कंपनी में टेक लीड है, थोड़ा भावुक हो जाता है।
“हम टेक्नोलॉजी बना सकते हैं, लेकिन रिश्ते बनाना… ये हॉस्टल ने सिखाया है। यही असली इनोवेशन है। तुम सब मेरे सबसे अच्छे कोड हो।”
सब एक साथ हँस पड़ते हैं।
इसके बाद प्रिया कहती है,
“विक्रम, इस बार तुम्हारे लिए एक डिजिटल राखी डिज़ाइन की है… देखो।”
स्क्रीन पर राखी की एक डिजिटल इमेज उभरती है, उसके नीचे लिखा होता है...
“तू मौली का भाई है… अब हर लड़की का भी।”
विक्रम की आँखें थोड़ी नम हो जाती हैं लेकिन वो मुस्कुराता है।
“शुक्रिया, प्रिया… मौली होती तो बहुत खुश होती।”
स्क्रीन पर अचानक कैमरा थोड़ा हिलता है और विक्रम के कमरे की दीवार दिखती है...
सुपर 8 की एक पुरानी तस्वीर। सभी के हँसते चेहरे… यादें, ठहाके, और वादे।
“तुमने ये फोटो आज भी लगा रखी है?”
विक्रम शांत होकर कहता है,
“कुछ तस्वीरें यादें नहीं होतीं… दिशा होती हैं।”
बातों ही बातों में आकाश अचानक चिल्लाता है,
“अरे! आइडिया! क्यों न अगली राखी पर सब गाँव में मिलें?”
“सुपर 8 रीयूनियन!”
सभी की आँखों में चमक आ जाती है। जैसे अचानक बारिश के बाद धूप फूट पड़ी हो। सबके चेहरे ख़ुशी से दमक उठते हैं। सभी हाँ में सिर हिलाकर सहमति देते हैं।
राशि: “इस बार पुराने कमरे में रील्स नहीं, असली बातें होंगी।”
शशांक: “और पिछली बार की तरह माँ के हाथ के आलू के पराठे खाने की प्रतियोगिता!”
प्रिया: “और इस बार, मौली की किताब में सबके नाम एक-एक पन्ने पर लिखे जाएँगे।”
सभी अपनी-अपनी सहमति में सिर हिलाते हैं।
विक्रम थोड़ी देर चुप रहता है, फिर धीमे से कहता है,
“मुझे लगता था, समय हर दर्द को बहा ले जाता है... लेकिन मौली कहीं रुकी है… और शायद मैं भी वहीं अटका हूँ।”
प्रिया, स्क्रीन की ओर देखते हुए, गहरे स्वर में कहती है,
“तुम्हारे हर प्रयास में वो ज़िंदा है विक्रम... और हम सब उस जीवन का हिस्सा हैं।”
वीडियो कॉल धीरे-धीरे समाप्त होती है। एक-एक कर खिड़कियाँ बंद होती हैं। लेकिन वो जोड़ी जो इन आठ खिड़कियों ने बनाई थी वो और भी पक्की हो चुकी है। जैसे ही वीडियो कॉल समाप्त होती है कमरे में फिर से सन्नाटा फैल जाता है।
“एक गाँव, एक सपना, एक मिशन”
उसके ठीक बगल में मौली की तस्वीर के नीचे वही पुरानी फ्रेम की हुई तस्वीर...
सुपर 8 की हँसती हुई तस्वीर... समय की धूल से थोड़े धुंधले लेकिन आत्मीयता से चमकते हुए।
विक्रम धीरे से तस्वीर को निहारता है और कहता है,
“हम अलग शहरों में सही… लेकिन हमारी आत्मा अब भी एक गाँव में रहती है।”
खिड़की से हल्की हवा भीतर आती है और लगता है जैसे मौली की आवाज़ कमरे में गूंजती है,
“भैया, एक दिन मुझे भी साथ पढ़ाना।”
विक्रम मुस्कराता है… साथ में लगी मौली की तस्वीर और सुपर 8 की तस्वीर की ओर देखता है और धीरे से कहता है,
“और आज सुपर 8 उस एक वाक्य को अपने-अपने शहरों में जी रहे हैं।”
वो अपनी डायरी खोलता है, कलम उठाता है और लिखता है,
“रिश्ते समय से नहीं, साझा संघर्ष से बनते हैं… और सुपर 8… हम एक कहानी हैं, जो कभी खत्म नहीं होती।”
“शहर बदलते हैं, दोस्त नहीं।”
क्रमशः
आगे क्या होता है जानने के लिए पढ़िए अगला भाग... भाग 30: अधूरा रीयूनियन
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