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प्रियंका की कलम से 🖋 – एक हिंदी ब्लॉग, जहाँ प्रियंका सक्सेना ‘जयपुरी’ के उपन्यास, कविताएँ, कहानियाँ, लघुकथाएँ, ग़ज़लें और ज्ञानवर्धक लेख पढ़ने को मिलते हैं। यहाँ शब्दों में बसता है साहित्य, संस्कृति, संवेदना, विज्ञान, तकनीक और ज्ञान।
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संकुचित सोच : लड़की के तो भाई नहीं है !
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होई अष्टमी व्रत बेटी के लिए क्यों नहीं ?
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मायके को नीचे दिखाकर ससुराल में मान नहीं मिलेगा, बिटिया!
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बहू के बड़े भाई का टीका ! ना बाबा ना !!!
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हौसला व हिम्मत हों तो मुश्किलें घुटने टेक देती हैं!
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जो अपने लिए खराब वो कामवाली के लिए अच्छा कैसे ?
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जाके पाँव न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई
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