संदेश

2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वो डाइनिंग टेबल – कविता

भीड़ में अक्स अक्सर फ़ना हो जाता है | भावपूर्ण हिंदी ग़ज़ल

कुछ तो बात रही होगी - ग़ज़ल

धुआँ धुआँ ज़िंदगी - कविता

तेरी आँखों की भुलभुलैया में - कविता

उसका जहान - कविता

शहर से गाँव तक - कविता

देवी ना बनाओ मुझको तुम - कविता

चाक पर थिरकते हाथ कुम्हार के - कविता

ज़िंदगी बनाम साइकिल की चेन - कविता

उम्मीद पर दुनिया कायम है - लघु कथा

सांस लेते ही तुम मुझमें रच-बस गईं मानो - कविता