बच्चे को मोहरा न बनाएं - लघु कथा
बच्चों को मोहरा न बनाएं
बच्चों की मासूमियत को अपने स्वार्थ या परिस्थितियों का मोहरा बनाना उनके भविष्य के साथ अन्याय है।
![]() |
| बच्चों के बचपन को मोहरा न बनाएं — एक संवेदनशील लघु कथा |
यह लघु कथा समाज को एक गहरा संदेश देती है कि बच्चों को मोहरा नहीं बनाना चाहिए।
आपकी क्या राय है? कमेंट में जरूर बताएं।
अगर आपको ऐसी और रचनाएँ पढ़नी हों तो 👉 प्रियंका की कलम से 🖋 पर ज़रूर जाएँ।- प्रियंका सक्सेना 'जयपुरी'

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें