संदेश

वो निर्णायक पल!

बहू के बड़े भाई का टीका ! ना बाबा ना !!!

हौसला व हिम्मत हों तो मुश्किलें घुटने टेक देती हैं!

जो अपने लिए खराब वो कामवाली के लिए अच्छा कैसे ?

ऐसे घरवालों की ज़रूरत नहीं!

जाके पाँव न फटी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई

श्राद्ध डे

बेटी और बहु के लिए अलग मापदंड क्यों?